Kohramlive : भारत सरकार ने एक ऐसा कार्यक्रम शुरू किया है जो युवाओं को नई दिशा देगा, वहीं, देश के सांस्कृतिक ताने-बाने को और भी मजबूती से जोड़ देगा। यह है ‘अष्टलक्ष्मी दर्शन’, एक दूरदर्शी पहल जो युवाओं को पूर्वोत्तर भारत की रंगीन संस्कृति, विविधता और विकास की गाथा से परिचित करायेगा। इस योजना के तहत अगले 5 वर्षों में 3200 छात्र देश के विभिन्न कोनों से निकलकर पूर्वोत्तर भारत की ओर कूच करेंगे, जैसे अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम एवं त्रिपूरा, हर बैच में 100 छात्र होंगे और वे दो सप्ताह तक इन राज्यों में रहकर यहां की धरती, लोगों और परंपराओं को महसूस करेंगे। कार्यक्रम के अनुसार, छात्रों को 5 दिन स्थानीय कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों में कक्षाएं दी जायेगी। सप्ताहांत में वे नजदीकी गांवों का दौरा करेंगे, जहां उन्हें पूर्वोत्तर की जीवनशैली, लोक परंपरा और संस्कृति को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। यह कार्यक्रम नवंबर या दिसंबर से शुरू होगा। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया ने बताया कि “हम चाहते हैं कि देश के युवा पूर्वोत्तर को सिर्फ नक्शे पर न देखें, बल्कि उसकी मिट्टी की खुशबू में डूबकर भारत की विविधता को महसूस करें।”
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