Bihar : फर्जी IAS अधिकारी बनकर करोड़ों की ठगी करने वाले गौरव कुमार सिंह उर्फ ललित किशोर की गिरफ्तारी के कुछ मिनट बाद ही उसकी प्रेमिका ने व्हाट्सऐप स्टेट्स पर उसकी फोटो लगाकर लिखा, “मिस यू जानू…”। स्टेट्स का स्क्रीनशॉट वायरल होते ही पुलिस भी चौंक गई कि गिरफ्तारी की खबर इतनी जल्दी उसके नजदीकी सर्किल तक पहुंच गई। पुलिस के मुताबिक, युवती बिहार के उसी क्षेत्र की रहने वाली है, जहां ललित का परिवार रहता है। ललित खुद को 2022 बैच का IAS बताकर सोशल मीडिया पर चमकदार छवि बनाये हुये था। इसी प्रभावशाली व्यक्तित्व के चक्कर में कई लोग ही नहीं, उसके करीब आने वाली युवतियां भी उसे वास्तविक अधिकारी समझ बैठती थीं। बिहार के मोकामा के व्यापारी मुकुंद माधव से 5 करोड़ रुपये की ठगी के बाद बढ़ते दबाव से बचने के लिये आरोपी अपनी पत्नी, दो बच्चों और साले के साथ गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र में किराये के मकान में रहने लगा। घर के बाहर “IAS गौरव कुमार” की नेमप्लेट लगी थी। घर के बाहर हमेशा हथियारबंद गार्ड, 4–5 लग्जरी गाड़ियां, सरकारी दौरे जैसी आवाजाही। कुछ पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि उसके तौर-तरीके और महंगे तामझाम ने किसी को भी शक नहीं होने दिया। पुलिस जांच में पता चला कि ललित मूल रूप से सीतामढ़ी के मेहसौल का निवासी है। पहले वह सुपर 100 कोचिंग सेंटर में गणित का शिक्षक था, एडमिशन के नाम पर 2 लाख लेने पर 2023 में नौकरी से निकाला गया। M.Sc. के बाद मैथ्स में PhD कर रहा था। 2016 में पहली FIR उसके खिलाफ दर्ज हुई। एक युवती को बहला-फुसलाकर ले जाने का इल्जाम लगा था। अब यहीं युवती उसकी पत्नी है।
उसके मासिक खर्चे
- 10–12 गनर — 30,000 रुपये प्रति व्यक्ति
- निजी मैनेजर — 60,000 रुपये
- दो लग्जरी गाड़ियां (स्कॉर्पियो, अर्टिगा) — 30-30 हजार EMI
- होटलों में रहने पर 30,000 रुपये मासिक
- ब्रांडेड कपड़े, मोबाइल, ज्वेलरी पर भारी खर्च
सरकारी गाड़ी जैसा लुक देने के लिये वह निजी वाहनों पर ‘सरकारी कार्य’ लिखवा कर चलता था।
एक पत्नी और चार प्रेमिकायें, तीन गर्भवती
जांच में यह भी सामने आया कि ललित की निजी जिंदगी उसके ठगी नेटवर्क जितनी ही चौंकाने वाली है, एक पत्नी और चार प्रेमिकायें हैं। इनमें से तीन गर्भवती पाई गईं। सभी पर लाखों रुपये, महंगे मोबाइल और ज्वैलरी खर्च किये। गोरखपुर, भटहट, पीपीगंज, कैम्पियरगंज आदि क्षेत्रों के स्कूलों में वह दो लग्जरी गाड़ियों और गनरों के काफिले के साथ ‘IAS निरीक्षण’ करने पहुंचता था। अब तक धन उगाही की शिकायत नहीं मिली है, लेकिन पुलिस सभी दौरों की जांच कर रही है।
AI को बनाया हथियार
ललित ने ठगी के नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिये AI का भी इस्तेमाल किया, मीटिंग लेटर, मंत्रालय नोट, नियुक्ति आदेश, अनुमोदन पत्र, अधिकारियों वाली बैठकों की फोटो से अपना चेहरा जोड़ना, उसके पास से देवरिया DM की मीटिंग का एडिटेड फोटो भी बरामद हुआ है। गोरखपुर पुलिस पूरे मामले की गहराई से तहकीकात कर रही है।





