Kohramlive : कभी पिज्जा और बर्गर के साथ विदेशी चीज का नाम ही लोगों की जुबान पर होता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। भारत की पारंपरिक और देसी चीज दुनिया के बड़े मंचों पर अपनी पहचान बना रही है। ब्राजील में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय चीज प्रतियोगिता में भारतीय चीज की दो किस्मों को सम्मान मिलने के बाद देशभर में इसकी चर्चा तेज हो गई है। खास बात यह रही कि PM नरेंद्र मोदी ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुये सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा की और भारतीय चीज की बढ़ती वैश्विक पहचान को “लोकल से ग्लोबल” की शानदार मिसाल बताया।
कश्मीर की कलारी
अगर भारत की सबसे चर्चित देसी चीज की बात हो तो जम्मू-कश्मीर की कलारी सबसे आगे नजर आती है। पहाड़ों की गोद में रहने वाले गुर्जर-बकरवाल समुदाय द्वारा पीढ़ियों से बनाई जा रही यह चीज अपने खास स्वाद और मुलायम बनावट के लिये मशहूर है। जब इसे तवे पर सेंका जाता है तो बाहर से कुरकुरी और अंदर से मुलायम हो जाती है। यही वजह है कि इसे कई लोग “कश्मीर का मोजेरेला” भी कहते हैं।
चुरपी, याक के दूध से बनने वाली अनोखी चीज
लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में चुरपी का स्वाद लोगों की जिंदगी का हिस्सा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे याक के दूध से तैयार किया जाता है। यह दुनिया की सबसे ज्यादा चबाई जाने वाली चीजों में गिनी जाती है। स्थानीय लोग इसे घंटों तक चबाते रहते हैं, ठीक वैसे जैसे कोई टॉफी खाई जा रही हो।
महाराष्ट्र-गुजरात की शान है टोपली नु पनीर
पश्चिम भारत में भी चीज की अपनी अलग कहानी है। महाराष्ट्र और गुजरात में बनने वाला टोपली नु पनीर या सुरती चीज पारंपरिक स्वाद का शानदार उदाहरण माना जाता है। बांस या टोकरी जैसी संरचना में तैयार होने के कारण इसका नाम टोपली नु पनीर पड़ा। इसका स्वाद हल्का, मुलायम और बेहद लाजवाब माना जाता है।
बंडेल चीज, पुर्तगाल से जुड़ी विरासत
पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के बंडेल क्षेत्र में बनने वाली यह खास चीज अपने इतिहास और स्वाद दोनों के लिए मशहूर है। कहा जाता है कि इसकी शुरुआत पुर्तगाली प्रभाव के दौर में हुई थी। छोटे गोल आकार में मिलने वाली यह चीज हल्की नमकीन और धुएं की खुशबू से भरपूर होती है। इसकी स्मोकी फ्लेवर इसे बाकी चीजों से अलग पहचान देती है।
कालिम्पोंग चीज का यूरोपीय अंदाज
दार्जिलिंग और सिक्किम के करीब बसे खूबसूरत पहाड़ी शहर कालिम्पोंग की चीज भी कम मशहूर नहीं है। इसकी बनावट थोड़ी सख्त होती है और स्वाद यूरोप की प्रसिद्ध गौडा चीज से मिलता-जुलता माना जाता है। वर्षों पहले एक पादरी द्वारा शुरू की गई यह परंपरा आज भी लोगों के स्वाद पर राज कर रही है।
कुदम, महीनों तक सुरक्षित रहने वाली देसी चीज
कश्मीर के गुर्जर-बकरवाल समुदाय की एक और अनोखी देन है कुदम चीज। यह काफी चबाने वाली होती है और लंबे समय तक खराब नहीं होती। पहाड़ों में रहने वाले समुदायों के लिए यह वर्षों से पौष्टिक भोजन का हिस्सा रही है। इसका स्वाद हल्का होता है, लेकिन इसकी उपयोगिता बेहद खास मानी जाती है।
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