कोहराम लाइव डेस्क : सदी के मेगास्टार Amitabh Bachchan ने अपने बाबुजी और हिन्दी के प्रख्यात कवि Harivansh Rai Bachchan की बर्थ एनिवर्सिरी पर याद किया। बिग बी ने शुक्रवार को ट्विटर पर अपने पिता की तस्वीर साझा की और इसके साथ ही उन्होंने कुछ पंक्तियां भी लिखी।
“मैं महान काव्य लिखना चाहता हूँ, महाकाव्य नहीं !”
Amitabh Bachchan ने ट्वीट किया, “मैं महान काव्य लिखना चाहता हूँ, महाकाव्य नहीं !” पर उन्होंने महान काव्य ही नहीं लिखा आत्मकथा के रूप में “महाकाव्य” भी रचा है। गद्यात्मक महाकाव्य …. महाकाव्य में पर -चरित होता है, इसमें स्वचरित है। भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय कवियों में बच्चन जी का स्थान सुरक्षित।”
Amitabh ने किया एक और ट्वीट
बिग बी ने एक और ट्वीट किया, “27 नवंबर, 2020 पूज्य बाबुजी Dr. Harivansh Rai Bachchan जी की 113वीं जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि शत-शत नमन। “मैं कलम और बंदूक़ चलता हूं दोनों ; दुनिया में ऐसे बंदे कम पाए जाते हैं। “मैं छुपाना जानता तो जग मुझे साधु समझता; शत्रु मेरा बन गया है छल रहित व्यवहार मेरा”। -बच्चन”
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हिंदी में हालावाद के प्रवर्तक
आपको बता दें कि हिंदी में हालावाद के प्रवर्तक माने जाते हैं Harivansh Rai Bachchan। उनका जन्म 27 नवंबर 1907 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के बाबूपट्टी गांव में हुआ था। उन्हें कई पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है। उनकी 1935 में छपी ‘मधुशाला’ को आज भी लोग याद करते हैं। इस किताब की रचनाओं ने साहित्य जगत को एक अलग ही पहचान दी थी।
साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया
इसके अलावा Harivansh Rai Bachchan को ‘दो चट्टानें’ के लिए हिन्दी कविता का साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। भारत सरकार ने 1976 में साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था।
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