Kohramlive : रात के सन्नाटे में जब दुनिया सो रही थी, आसमान की गहराइयों में गूंजा एक ऐसा धमाका, जिसने एक बार फिर मानवता को दहला दिया। ईरान के फोर्डो, इस्फहान और नतांज जैसे संवेदनशील परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले की खबर सबसे पहले खुद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक की। उन्होंने इसे “अमेरिका की सैन्य ताकत की मिसाल” बताया। रविवार की सुबह ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “हमने फ़ोर्दो, नतांज़ और इस्फ़हान समेत ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर सफलतापूर्वक हमलों को अंजाम दिया है। सभी विमान अब ईरान के वायु क्षेत्र से बाहर हैं।” ट्रंप ने आगे लिखा कि फ़ोर्दो पर ‘सारे बम’ गिराये गये हैं और सभी विमान सुरक्षित रूप से अमेरिका वापस लौट रहे । साथ ही ट्रंप ने लिखा कि ‘हमारे महान अमेरिकी योद्धाओं को बधाई। दुनिया में कोई और सेना नहीं है जो ये कर सकती थी। अब शांति का समय है।’ लेकिन इस शौर्य का शोर अंतरराष्ट्रीय नियमों की दीवार से टकराता दिखा।
ईरान की परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने हमलों की पुष्टि करते हुये कहा कि यह सिर्फ बम नहीं, अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर किया गया हमला था। लेकिन साथ ही उन्होंने अपने देशवासियों को भरोसा भी दिलाया कि “हमारे वैज्ञानिकों की मेहनत पर कोई रुकावट अब असर नहीं करेगी।”
सरकारी एजेंसी IRNA ने बताया कि हमले फोर्डो की पहाड़ियों से लेकर नतांज की गहराइयों तक हुये पर तेहरान के दक्षिणी इलाकों में रहने वालों के लिए कोई खतरा नहीं है। इस बीच राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बातचीत में साफ कहा कि “जायोनी शासन (इजरायल) की आक्रामकता यदि नहीं रुकी तो हमारी प्रतिक्रिया और भी विनाशकारी होगी।” दुनिया की नजरें अब इस टकराव पर टिकी हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी “यह संघर्ष तेजी से नियंत्रण से बाहर हो सकता है। अगर अब भी कूटनीति की राह नहीं चुनी गई, तो परिणाम न केवल इस क्षेत्र के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी हो सकते हैं।”








