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अद्भुत, इस मंदिर के पत्‍थर भी सुनाते है बाबा भोले के डमरू का संगीत

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कोहराम लाइव डेस्क : भारत की स्‍थापत्‍य कला यानी आर्ट ऑफ स्क्रिप्‍चर की खासियत पूरी दुनिया में मशहूर है। इसके साथ यह बात भी महत्‍वपूर्ण है कि इसके प्राचीन भवनों और मंदिरों से तरह-तरह के ऐसे रहस्‍य भी जुड़े हैं, जो रोमांचित भी करते है और हैरत में भी डालते हैं। ऐसे रहस्‍यों का जुड़ाव हमारे देश के मंदिरों से अधिक है।देश के हर क्षेत्र में कोई न कोई ऐसा मंदिर जरूर मिल जाएगा, जो अपने आप में कोई न कोई रहस्य जरूर रखता है। जी हां, आज हम बात कर रहे हैं भारत की देवभूमि हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित भगवान शिव को समर्पित जटोली शिव मंदिर की। स्‍थानीय लोगों और बाहर से इस मंदिर का दर्शन करने के लिए जाने वाले पर्यटकों का कहना है कि यहां के पत्‍थरों को थपथपाने से डमरू की आवाज निकलती है।

यानी यहां के पत्‍थर भी सुनाते हैं भगवान भोले के डमरू का संगीत।

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एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर

इस मंदिर के बारे में दावा किया जाता है कि यह एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है। सभी जानते हैं कि हिमाचल प्रदेश को देवभूमि कहा जाता है। यहां के मंदिर रहस्यों से भरे पड़े हैं। सोलन जिले में मौजूद इस मंदिर का नाम जटोली शिव मंदिर है। दक्षिण-द्रविड़ शैली में बने इस मंदिर की ऊंचाई लगभग 111 फुट है।

कृष्‍णानंद परमहंस का आगमन

मंदिर का भवन निर्माण कला का एक बेजोड़ नमूना है, जो देखते ही बनता है। इस मंदिर को लेकर ये मान्यता है कि पौराणिक काल में भगवान शिव यहां आए थे और कुछ समय के लिए यहां रहे भी थे। बाद में 1950 के दशक में स्वामी कृष्णानंद परमहंस नाम के एक बाबा यहां आए थे। बाद में उनके मार्गदर्शन और दिशा-निर्देश पर ही जटोली शिव मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ।

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39 साल लगे मंदिर बनाने में

साल 1974 में उन्होंने ही इस मंदिर की नींव रखी थी। साल 1983 में उन्होंने समाधि ले ली, लेकिन मंदिर का निर्माण कार्य रुका नहीं, बल्कि इसका कार्य मंदिर प्रबंधन कमेटी देखने लगी। जटोली शिव मंदिर को पूरी तरह तैयार होने में करीब 39 साल का समय लगा था। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस मंदिर की सबसे खास बात ये है कि इसका निर्माण देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के पैसों से हुआ है।

हर तरफ देवीदेवताओं की मूर्तियां

इस मंदिर में हर तरफ विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं, जबकि मंदिर के अंदर स्फटिक मणि शिवलिंग स्थापित हैं। इसके अलावा यहां भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्तियां भी स्थापित की गई हैं।

11 फुट ऊंचा सोने का कलश

मंदिर के ऊपरी छोर पर 11 फुट ऊंचा एक विशाल सोने का कलश भी स्थापित है, जो इसे बेहद ही खास बना देता है। हर साल यहां हजारों की संख्या में देश-विदेश से श्रद्धांलु यहां पहुंचते हैं और अपने लिए कामना करते हैं।

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