Hazaribagh : गरीबों के हक में सारा दावा दम तोड़ गया। गरीब भुनेश्वर मल्हार को बचाया नहीं जा सका। भुनेश्वर मल्हार लाचार-बेबश घरवालों ने उसका दाह संस्कार कर दिया। भुनेश्वर की झोपड़ी में न चारपाई, न बिस्तर और न रजाई है। सोने-लेटने के लिये जमीन पर पुआल का बिस्तर बना रखा था। बीती रात उसे बहुत जोर से ठंडा लगने लगा। कभी पांव तो कभी हाथ की हथेली रगड़ उसे गर्मी देने की कोशिश की गई, पर उसकी हालत बिगड़ती चली गई। घरवाले कुछ समढ पाते, उसने सदा के लिये अपनी आंखें मूंद ली। कुछ लोगों ने सुना था कि वह कई रातें ठीक से सोया नहीं था, घरवाले भरपेट खाये भी नहीं थे। अब वो सदा के लिये सो गया। यह वाक्या हजारीबाग के बरकट्ठा बरकटठा प्रखंड के लगनवां गांव से सामने आया है।
मौके पर पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि समीम अंसारी ने पहुंचकर मृतक के परिजनों को ढांढस बंधाया हरसंभव मदद करने का आश्वासन दिए। मौके पर पंसस प्रतिनिधि समीम अंसारी ने सरकार , प्रशासन और प्रखण्ड विकास पदाधिकारी अविलंब आदिम जनजातियों को कम्बल, और अलाव की व्यवस्था करने की मांग की ताकि लोग शीतलहरी प्रकोप से बच सकेें। मौके पर पूर्व विधायक जानकी यादव सिलाडीह मुखिया निजाम अंसारी पंचायत सचिव कैलाश प्रसाद कुशवाहा उप मुखिया शादी पासवान पंचायत समिति प्रतिनिधि राजकुमार गिरी अरूण कुमार समेत सैकड़ों ग्रामीण व जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
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