Kohramlive : विदेश मंत्रालय ने भारतीयों को सलाह दी है कि अगली सूचना तक ईरान और इस्राइल की यात्रा न करें। वहीं, जो वर्तमान में ईरान और इस्राइल में रह रहे हैं, उन्हें अलर्ट रहने और अपनी गतिविधियों को कम लोगों के साथ ही साझा करने का अनुरोध किया है। भारतीय दूतावास से संपर्क कर पंजीकरण कराने की सलाह दी है। भारत ने अपने यहां के मजदूरों को इस्राइल भेजने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। अप्रैल-मई में छह हजार निर्माण मजदूरों को इस्राइल भेजने की प्लानिंग थी। भारतीय विदेश मंत्रालय का यह फैसला इस्राइल और हमास के बीच जारी युद्ध के चलते आया है। आशंका है कि इस्राइल और हमास के बीच जारी युद्ध में ईरान भी हस्तक्षेप कर सकता है। इधर, अमेरिका ने भी खतरे को देखते हुये अपने नागरिकों को ऐसी ही एडवाइजरी जारी की है। अमेरिका ने अपने लोगों से यात्रा से बचने, दिशा निर्देशों का पालन करने और जरूरत पड़ने पर दूतावास में संपर्क करने को कहा है।
युद्ध कब और कैसे शुरू हुआ?
बीते साल 7 अक्टूबर को हमास ने इस्राइल की अभेद्य मानी जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था को तोड़ते हुये उसके इलाकों में हमला किया था। इस हमले में 1200 से ज्यादा इस्राइलियों की जानें गई थीं। वहीं, हमास लड़ाके 240 लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले गये थे। वहीं, इस्राइल के जवाबी हमलों में हजारों फलस्तीनियों की मौत हो चुकी है। गाजा के 24 लाख लोगों में से 19 लाख अपने घरों से विस्थापित हो गये हैं, इनमें बच्चे भी शामिल हैं। हमले के बाद इस्राइल ने हमास को जड़ से मिटाने का संकल्प लिया था। इसके लिए इस्राइली सेना ने गाजा में हवाई और जमीनी हमले किये। इस वजह से हमास और इस्राइल के बीच खूनी जंग जारी है। हालांकि, हाल ही में जो बाइडन के एक बयान से दोनों पक्षों में युद्धविराम को लेकर अटकलें शुरू हो गईं।
इस वजह से ईरान की हो सकती है जंग में एंट्री
बीते 1 अप्रैल को सीरिया में ईरान के वाणिज्य दूतावास पर हमला हुआ था। इससे दूतावास का एक खंड पूरी तरह ध्वस्त हो गया था। वहीं, ईरान के दो शीर्ष सैन्य जनरल और पांच अन्य अधिकारी भी मारे गये थे। ईरान इस हमले के लिये इस्राइल पर इल्जाम लगा रहा है। वहीं, जवाबी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई ने बुधवार को चेतावनी दी थी कि इस्राइल को सजा दी जानी चाहिये। उस पर इस्राइली विदेश मंत्री ने कहा था कि अगर ईरान हमला करता है तो हम कड़ा जवाब देंगे। चेतावनी को देखते हुए इस्राइल गुरुवार को अलर्ट पर था। इस्राइल ने अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने और लड़ाकू इकाइयों को छुट्टी न देने का फैसला लिया। ईरानी राष्ट्रपति के राजनीतिक मामलों के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ मोहम्मद जमशीदी ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि अमेरिका को बीच में नहीं आना चाहिये, ताकि वह हमले की चपेट में न आ जाये। अमेरिका ने भी चेतावनी दे दी है। खबर है कि ईरान द्वारा जवाबी कार्रवाई की कसम खाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने बुधवार को इस्राइल को अपना समर्थन दिये जाने पर जोर दिया।
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