Kohramlive : जम्मू-कश्मीर के त्रिकुटा पहाड़ों पर बीते 26 अगस्त की दोपहर अचानक प्रकृति का कहर टूटा था, भारी भूस्खलन में 34 श्रद्धालुओं ने अपनी जान गंवा दी, 20 से अधिक घायल हो गये थे। इस दर्दनाक हादसे की जांच के लिये उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी है। समिति दो हफ्तों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
श्राइन बोर्ड का बयान
बोर्ड ने श्रद्धालुओं की मौत पर गहरा शोक जताया। मीडिया में आई खबरों को बेबुनियाद बताया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि चेतावनी को नजरअंदाज कर यात्रा जारी रखी गई। बोर्ड ने साफ कहा कि सुबह 10 बजे तक मौसम सामान्य था, हेलिकॉप्टर सेवा भी चल रही थी। जैसे ही मौसम बिगड़ने का अंदेशा हुआ, पंजीकरण रोक दिये गये। अधिकतर श्रद्धालु सुरक्षित कटरा लौट चुके थे। कुछ यात्री पुराने ट्रैक पर आश्रय शेड में ठहरे थे, जो अब तक सबसे सुरक्षित माने जाते थे।लेकिन 2.40 बजे बादल फटा, और अचानक 50 मीटर के हिस्से में भारी भूस्खलन हो गया। यह इलाका अब तक पूरी तरह सुरक्षित माना जाता था, यहां पहले कभी ऐसी घटना नहीं हुई। श्राइन बोर्ड का आपदा प्रबंधन बल, सेना, CRPF, NDRF और SDRF ने तुरंत मोर्चा संभाला। 18 घायलों को मौके से निकालकर श्राइन बोर्ड अस्पताल ले जाया गया। सभी फंसे श्रद्धालुओं को शाम तक सुरक्षित कटरा पहुंचा दिया गया। मलबा हटाने और ढलान स्थिरीकरण का काम युद्ध स्तर पर जारी है।
बोर्ड की अपील
- “तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
- मौसम की चेतावनी पर लगातार निगरानी रखी गई और SOP के तहत हर कदम उठाया गया।
- श्राइन बोर्ड ने मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।










