spot_img

कॉलेज गर्ल नैंसी के सपनों पर तीखी चोट…

Date:

spot_img
spot_img
📖भाषा चुनें और खबर सुनें:
🎙️कोहराम LIVE रेडियो

Ranchi(Aarti Gupta) : ऊंचे ख्वाब देखने वाली आंखों में जब बेबसी का धुंधलका छा जाये, तो दर्द किसी दस्तावेज़ से बड़ा हो जाता है। नैंसी सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है—एक होनहार छात्रा, जिसने हर परीक्षा को पूरी निष्ठा से दिया, कॉलेज के हर नियम का पालन किया, लेकिन जब मेहनत का फल मिलने का समय आया, तो पहचान पर ही सवाल उठा दिया गया।

साल 2018 में नैंसी ने बड़े सपनों के साथ DSPMU, रांची में बीएससी जूलॉजी ऑनर्स में दाखिला लिया था। लेकिन कुछ निजी कारणों से दो साल का ब्रेक लेना पड़ा। खुद को फिर से संभालने के बाद जब 2020 में दोबारा कॉलेज पहुंची, तो उसने अपनी अधूरी पढ़ाई को पूरा करने का मन बनाया। कॉलेज प्रशासन ने दोबारा पढ़ाई की अनुमति तो दी, लेकिन औपचारिकताओं में ऐसा उलझाया कि तीन साल बाद उसकी मेहनत ही ‘अमान्य’ कर दी गई। कॉलेज ने उसका रोल नंबर पुराने सेशन (2018-21) का ही रखा, जबकि उसे 2020-23 के बैच में शामिल किया गया। इस अजीबोगरीब व्यवस्था को लेकर नैन्सी ने कई बार प्रशासन से पूछा, लेकिन उसे हर बार यही कहा गया—”तुम बस पढ़ाई पर ध्यान दो, बाकी सब ठीक हो जायेगा।” भरोसा किया और पढ़ाई में जुट गई। इसी बीच सेंट्रल गवर्नमेंट के AIR 83 एग्जाम में भी शानदार प्रदर्शन किया। मीडिया में सुर्खियां बनीं, अखबारों में तस्वीर छपी, और कॉलेज ने भी गर्व से कहा—”यह DSPMU की छात्रा है!”

नैंसी की मेहनत रंग लाई। हर परीक्षा दी, अच्छे अंकों से पास हुई और उसने 84% से अधिक अंक हासिल किये। 7 जनवरी 2025 को जब DSPMU के दूसरे दीक्षांत समारोह का समय आया तो उसने भी इसके लिए रजिस्ट्रेशन किया।  लेकिन, जब गोल्ड मेडल की बारी आई, तो 80% स्कोर करने वाली छात्रा का नाम सामने आया और उसे गोल्ड मिला।  नैन्सी को झटका लगा। उसने कॉलेज प्रशासन से पूछा तो जबाव मिला तुम एक्स स्टूडेंट हो। नैंसी के लिये यह एक और सदमा था। उसने पूछा—”अगर मैं एक्स-स्टूडेंट थी, तो मेरी हर मार्कशीट पर सेशन 2020-23 क्यों लिखा? मैंने हर परीक्षा रेगुलर स्टूडेंट की तरह क्यों दी?” लेकिन हर सवाल या तो अनसुना कर दिया गया या टाल दिया गया। लिखित शिकायतें, ईमेल—सब अनदेखी कर दी गईं।

गोल्ड नहीं चाहिये, पहचान तो मिले

अब नैंसी बनारस यूनिवर्सिटी में आगे की पढ़ाई के लिए चुनी जा चुकी है, लेकिन रांची में उसके साथ जो हुआ, वह एक सवाल बनकर रह गया है। Kohramlive.com से बातचीत में उसने कहा—“मुझे कोई गोल्ड नहीं चाहिये, लेकिन मैंने जो मेहनत की, उसकी पहचान तो मिलनी चाहिये! अगर मैं एक्स-स्टूडेंट थी, तो तीन साल तक कॉलेज ने मुझे अंधेरे में क्यों रखा?”। वहीं नैंसी का इल्जाम है कि इस बात को राज्यपाल से भी छिपाया गया, उन्हें भी अंधेरे में रखा गया। वहीं इस मामले में कॉलेज प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है।

spot_img
spot_img
spot_img

Related articles:

इस शख्स ने चौंकाया अधिकारियों को, सवा करोड़ का सोना मिला बदन के अंदर…

Bihar : नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस अपनी रफ्तार से दिल्ली...

जब कानून खुद पहुंचा गांव की चौपाल…

Chouparan(Krishna Paswan) : न्याय तभी सार्थक होता है, जब...

इस स्कूल में गूंजीं तालियां, मेधावियों के गले में सजे गोल्ड मेडल…

Chouparan(Krishna Paswan) : मेहनत जब मंजिल तक पहुंचती है...

लूट के 1 घंटे के बाद 50 हजार के इनामी बदमाश का एन’काउंटर…

UP : कभी एक मासूम बच्चे की हत्या कर...