Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा के नवादा गांव में आज सुबह वो मंजर सामने आया जिसने हर आंख को नम कर दिया और पूरे इलाके को ग़मगीन। राजू शेखर चौधरी के घर में एक नया सेप्टिक टैंक तैयार हुआ था — घर की नींव से जुड़ी ज़रूरत, लेकिन किसी को क्या पता था कि यही टैंक उनकी ज़िंदगी की नींव को ही हिला देगा।
सबसे पहले गांव के मल्टू राम उस टैंक में उतरे। मगर समय बीतता गया और वे बाहर नहीं लौटे। चिंता में डूबे राजू शेखर खुद नीचे उतरे और फिर वही सन्नाटा। देखते-देखते दो और भाई — अजय चौधरी और चंद्रशेखर चौधरी उन्हें बचाने के लिए उस अंधेरी सुरंग में कूद पड़े, लेकिन किसे पता था कि वह टैंक एक ऐसा मौत का कुंआ साबित होगा, जहां से कोई लौट नहीं सकेगा। चारों की सांसें उस जहरीली गैस से थम गईं और गांव की सांसें उस पल जैसे थम सी गईं। गांव में चीख-पुकार मच गई। लोग दौड़े, चारों को बाहर निकाला गया, अस्पताल ले जाया गया… लेकिन जीवन की डोर पहले ही टूट चुकी थी।
तीन बेटे एक ही मां की गोद से निकले थे और एक ही दिन, एक ही टैंक में उसकी ममता का चिराग बुझा कर चले गये। चौथा बेटा, गांव का एक मेहनतकश, उनकी जान बचाने चला था, लेकिन ख़ुद बलि चढ़ गया। इस हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। SDO संजय कुमार, SDPO नीरज कुमार और थाना प्रभारी बृज कुमार अस्पताल पहुंचे और पूरे मामले की जांच शुरू की।
गांव में सन्नाटा है, हर गली ग़मज़दा है, और हर मां अपनी औलाद को सीने से लगाकर यही सोच रही है काश, उस टैंक में उतरने से पहले कोई रुक गया होता।












