Ranchi : CM हेमंत सोरेन आवास का प्रांगण आज केवल नेताओं की चहलकदमी से नहीं, बल्कि इतिहास और परंपरा की पदचापों से भर गया था। धोती-कुर्ता पहने एक वृद्ध, माथे पर लाल-सफेद गमछा बांधे युवा और आंखों में उम्मीद लिये महिलायें कुल मिलाकर संथाल समाज के 51 प्रतिनिधि CM हेमंत सोरेन से मिलने आये थे। ये मुलाकात महज शिष्टाचार नहीं थी, यह उनके देवता की पुकार थी। “मरांङ बुरू”, जिसे जैन समाज सम्मेद शिखर कहता है, वही पर्वत, गिरिडीह के पीरटांड में स्थित, संथालों की आस्था का वो जीवंत प्रतीक है, जिसे वे सदियों से अपना ईश्वर मानते आ रहे हैं। आज वे उसके अस्तित्व की रक्षा की गुहार लेकर CM के दरबार में आये थे। CM हेमंत सोरेन ने पूरे श्रद्धा और समझदारी के साथ उनका ज्ञापन पढ़ा। CM हेमंत सोरेन ने उन्हें आश्वासन दिया कि “आपकी आस्था को ठेस नहीं पहुंचने देंगे, झारखंड सरकार आदिवासी भावनाओं के साथ खड़ी है।” मौके पर संथाल प्रतिनिधिमंडल में लेखक भोगला सोरेन, मंत्री फागू बेसरा और अध्यक्ष रामलाल मुर्मू जैसे चेहरे भी शामिल थे, जिन्होंने सरकार को संविधान, कोर्ट आदेश, और परंपरा के सहारे अपनी दलीलें दीं। वहीं, मरांङ बुरू बचाओ संघर्ष समिति (संथाल समाज) के झारखंड, उड़ीसा, बंगाल एवं छत्तीसगढ़ के बुद्धिजीवी सदस्य शामिल थे।
उनकी मांगें
- मरांङ बुरू को संथालों का धार्मिक तीर्थ स्थल घोषित किया जाये।
- ग्राम सभा को उसके संरक्षण, निगरानी और प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी जाये।
- अवैध कब्जा, धार्मिक असंतुलन और एकतरफा सरकारी आदेशों को निरस्त किया जाये।
- सरना, जाहेर थान, मांझी थान जैसे अन्य धार्मिक स्थलों को भी वैधानिक संरक्षण मिले।
- फागुन शुल्क पक्ष तृतीय को मरांङ बुरू महोत्सव के रूप में राजकीय मान्यता दी जाये।
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