Hazaribagh : ढेर सारे अरमान संजोये विकास का दामन थामने वाली सीमा(बदला हआ नाम) आज बिल्कुल अकेली हो गई। अब न वो हंसती है, न रोती है, न खाती, न पीती और न ही कुछ बोलती है, बिल्कुल खामोश…. कई बार टोकने पर भी वह गुमसुम रहती है। अपनेपन की दुहाई देने वाले जैसे शब्द सुनते ही वह सहम जाती है। अब उसे किसी पर कोई भरोसा नहीं रहा। अब उसके पास जीने का कोई सहारा नहीं रहा। उसने खाना-पीना सब छोड़ दिया है, अन्न त्याग दिया है। अपने-पराये और जमाने से मिली तीखी चोट खाकर पूरी तरह से थक हार गई सीमा की शेष जिंदगी कैसे कटेगी इस बारे में न तो उसे कुछ पता और न ही उसे आश्रय देने वाले महिला होम के संचालकों को। नाम नहीं छापने की शर्त पर होम के कर्मचारियों ने सिर्फ इतना कहा कि जिस रोज वह यहां आई थी उसके चेहरे पर एक अलग चमक-दमक थी। पूछने पर उसने कहना था कि उसे बस अपने 18 साल के होने का इंतजार है, क्योंकि बाहर उसका प्यार इंतेजार कर रहा है। विकास उसे खुद से ज्यादा चाहता है। वो मरते दम तक उसे नहीं छोड़ सकती और न ही भूल सकती है। अचानक बीते 13 मार्च की शाम सीमा की चीख-चीत्कार से पूरा होम दहल गया। तब पता चला कि सीमा के प्यार यानी विकास उर्फ करमजीत की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई है। यह हत्या किसी और ने नहीं सीमा के घरवालों ने ही करवाई है। सीमा ने कहा कि जैसा मां-पापा, भाई और मामा बोले थे, वैसा कर दिखाया। लाखों रुपये खर्च करके शूटरों से मेरे विकास को मरवा दिये। विकास का कुसूर केवल इतना था कि वो उसे बेइंतहा चाहता था और दोनों ने घर से भागकर हरिद्वार में शादी कर ली थी। उसके बाद विकास को जेल तक भिजवाया गया और जब बेल पर जेल से बाहर निकला तो हर 5 दिन में उसे कोर्ट में हाजिरी देने जाना पड़ता था। इसी दरम्यान उसे मौत के घाट उतार दिया गया। गुजरे 5 दिनों से सीमा की हालत ऐसी हो गई है कि उसे न तो उसके कथित ससुराल वाले ले जाना चाहते। मायके वालों के लिये तो वह कब की मर चुकी, बाकी अन्य नाते-रिश्तेदार डर के मारे उसे अपने आंगन में नहीं लाना चाहते। होम के एक कर्मचारी का कहना है कि अगर सीमा की हालत पर गौर नहीं किया गया तो कभी भी कुछ अनर्थ हो सकता है।
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