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कारोबारी के सुसाइड में अफसर के खिलाफ ठोस क्लू, नहीं हो रही कार्रवाई

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  • अक्सर ‘वह’ कहा करते थे… जीने नहीं देगा ये अफसर
  • इंसाफ के लिए भटक रहे घरवाले, केस सीबीआई को देने की मांग
  • सुसाइड से कुछ घंटे पहले हरिशंकर ने सुधीर कुमार से की थी बात
  • धारा 306 के बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई

चाईबासा : कारोबारी ने किया Suicide …सुसाइड नोट भी छोड़ा…आत्महत्या का कारण भी लिखा…आरोपी के खिलाफ कई सुबूत भी मिले…फिर भी बीत गया एक साल…नहीं मिला इंसाफ…और मौत के जिम्मेदार पर अबतक कोई आंच नहीं…सिर्फ इसलिए क्योंकि वह, राज्य का एक अधिकारी है। Suicide मामले में सबसे बड़ा क्लू माना जाता है सुसाइड नोट… और जब उस नोट पर किसी का नाम होता है, तो पुलिस उसके खिलाफ कुछ न कुछ कार्यवाही तो करती ही है, पर इस मामले में वह भी नहीं हुआ। होता भी कैसे, आखिर आरोप उत्पाद अधीक्षक सुधीर कुमार पर जो लगा है।

यह आरोप लगा रहे हैं सुसाइड करने वाले चाईबासा जिले के किरीबुरु के शराब कारोबारी हरिशंकर प्रसाद के घरवाले। उनका कहना है कि जब सुसाइड नोट में मौत के जिम्मेदार का नाम है, तब पुलिस क्यों नहीं जांच कर रही है। सारे सुबूत होने के बाद भी कारोबारी की विधवा रीना चौरसिया को इंसाफ नहीं मिल रहा है। एक साल से पुलिस से न्याय की आस में भटक रहे कारोबारी के परिजन अब इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि उनका भरोसा पुलिस से उठ चुका है।

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शराब दुकान के मैनेजर हरिशंकर प्रसाद ने फांसी लगाकर कर लिया था Suicide

यह मामला है पश्चिम सिंहभूम के नोवामुंडी प्रखंड के किरीबुरू का। 12 दिसंबर 2019 को सरकारी शराब दुकान के मैनेजर हरिशंकर प्रसाद ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने एक सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें उसने अपनी मौत का जिम्मेदार तत्कालीन पश्चिम सिंहभूम उत्पाद अधीक्षक सुधीर कुमार को ठहराया था। सुसाइड नोट में लिखा था कि उत्पाद अधीक्षक सुधीर कुमार ने उनसे काफी रुपये लिये हैं और इसलिए वह अपनी जान दे रहे हैं।

पुलिस ने पूरे मामले की जांच की तो घर पर एक डायरी भी मिली, जिसमें उत्पाद अधीक्षक को बतौर रिश्वत 50 हजार रुपये देने का जिक्र भी है। कारोबारी की पत्नी और उनकी मां सावित्री देवी ने भी पुलिस को बयान दिया कि उत्पाद अधीक्षक उनके पति से अक्सर पैसों की डिमांड करते थे। उनको मानसिक रूप से प्रताड़ित किया करते थे। मेरे पति इतने परेशान थे कि वो कई बार कहते थे कि उत्पाद अधीक्षक उन्हें जीने नहीं देंगे। उन्होंने एक दिन मेरे भाई से भी फोन पर कहा था कि सुधीर कुमार ने सिंडिकेट की बैठक के बाद उनसे कहा था कि पैसे दो, नहीं तो चैन से रहने नहीं देंगे। वह बहुत तनाव में थे और मेरे भाई से खुलकर कहा था कि सुधीर कुमार हमारी जान ले लेगा। तब हम सभी बनारस एक शादी में गए हुए थे और मेरे पति घर पर अकेले थे। इसके बाद उन्होंने फोन ही नहीं उठाया और फिर पड़ोसियों ने हमें उनकी फांसी की बात फोन पर बताई।

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कॉल डिटेल खंगालने पर भी पता चला था कि सुधीर कुमार ने आत्महत्या से चंद घंटे पहले हरिशंकर से बात भी की थी। पुलिस को उत्पाद अधीक्षक सुधीर कुमार के खिलाफ सारे सबूत और गवाह मिल गए थे। 14 दिसंबर 2019 को ही उत्पाद अधीक्षक के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 के तहत मामला भी दर्ज हो गया था। इसके बाद भी उत्पाद अधीक्षक को न तो हिरासत में लिया गया और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई।

कारोबारी की पत्नी, मां और अन्य घरवालों ने अब मीडिया से पिता की छांव से वंचित हुए बच्चों के लिए न्याय की गुहार लगायी है। सुधीर कुमार शराब दुकान के लाइसेंस को रद्द करने की धमकी दे देकर पति से लाखों रुपये ऐंठते थे। इसी से परेशान होकर हरिशंकर ने आत्महत्या कर ली। उनका कहना है कि पुलिस ने मामले को दबा दिया है और उनके परिवार को न्याय दिलाने में उनका कोई साथ नहीं दे रहा है।

इस मामले में एक पुलिस अधिकारी पर आरोपी सुधीर कुमार को मदद करने के लिए विभागीय कार्रवाई की भी अनुशंसा की गयी है, लेकिन इस पर भी बड़े पुलिस अधिकारी चुप्पी साधे हैं। पुलिस की कार्रवाई निष्पक्ष और तेजी से हुई तो आरोपी को कम से कम दस साल की सजा हो सकती है।

आरोपी उत्पाद अधीक्षक ने आरोपों का बताया निराधार

मामले में आरोपी उत्पाद अधीक्षक सुधीर प्रसाद ने कहा कि उन पर लगे आरोप निराधार हैं और वे इसका खंडन करते हैं। बकौल उत्पाद अधीक्षक… इस मामले में लाइसेंसी धर्मेंद्र गुप्ता थे और मेरा उनसे कोई वास्ता ही नहीं था। नोटिस लाइसेंसी को ही जाता था, क्योंकि उन्हें ही ईटीडी जमा करना था। सरकार और विभाग के नियम के अनुसार ही पांच परसेंट विलंब शुल्क का नोटिस दिया गया था। फोन पर धमकी देने के संबंध में उन्होंने कहा कि यह सच नहीं है। मेरी उनसे बात हमेशा नोटिस को लेकर ही होती थी। हमेशा सरकारी पैसे को लेकर बात होती थी। उन्होंने बताया कि इस मामले में पुलिस ने उनसे पूछताछ की थी, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई थी।

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