Kohramlive: अयोध्या की पावन धरा एक बार फिर इतिहास की दहलीज पर खड़ी है। राम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूरे होने के पावन अवसर पर भक्ति, भाव और गर्व का संगम अपने शिखर पर है। इसी आस्था के महासागर में ओडिशा के राउरकेला से एक विशाल और दिव्य पंचधातु धनुष अयोध्या की ओर बढ़ चला है, जिसे देखकर श्रद्धालुओं की छाती गर्व से चौड़ी हो रही है। करीब 286 किलोग्राम वजनी यह शानदार धनुष सोना, चांदी, एल्युमीनियम, जस्ता और लोहे से निर्मित है। इसमें 986 ग्राम शुद्ध सोना और 2.5 किलोग्राम चांदी का प्रयोग किया गया है। करीब 8 फीट लंबा और 3.5 फीट चौड़ा यह धनुष त्याग, तपस्या और राष्ट्रभक्ति की मूर्त अभिव्यक्ति है।
आठ महीने, 48 महिला कारीगरों की साधना
तमिलनाडु के कांचीपुरम की 48 महिला कारीगरों ने आठ महीनों की कठिन मेहनत और समर्पण से इस धनुष को आकार दिया। उनके हाथों की कारीगरी में रामभक्ति की गहराई भी झलकती है। इस धनुष की सबसे खास बात यह है कि इस पर भारत की सैन्य उपलब्धियों और शहीद जवानों के नाम अंकित हैं। यह धनुष रामलला को समर्पण के साथ-साथ उन वीरों को नमन है, जिन्होंने देश के लिये सर्वस्व न्योछावर कर दिया। ओडिशा के 30 जिलों से गुजरती विशाल शोभायात्रा 3 जनवरी को रवाना हुई। 19 जनवरी को पुरी पहुंचेगी और 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला को अर्पित की जायेगी। यात्रा का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री दिलीप राम और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार ने भगवा ध्वज दिखाकर किया।











