Ranchi : झारखंड की धरती पर हरियाली, हवा में गर्व का एहसास और दिलों में “जय झारखंड” की गूंज। 15 नवंबर, वो तारीख जो इस राज्य की रगों में जोश बनकर बहती है, यही दिन था जब साल 2000 में झारखंड का जन्म हुआ और संयोग देखिये, यही दिन भगवान बिरसा मुंडा की जयंती का भी है। धरती आबा की पुण्य स्मृतियों के साथ झारखंड आज अपने 25 साल पूरे होने का स्वर्ण पर्व मना रहा है।
राजधानी में जश्न का रंग
रांची इन दिनों उत्सव के रंग में रंगी हुई है। मोरहाबादी मैदान सज-संवर चुका है, हर तरफ झंडे, फूलों की महक और रोशनी की लहरें। राज्यपाल, मुख्यमंत्री और गणमान्य अतिथि यहां राज्य स्थापना दिवस के मुख्य समारोह में शामिल होंगे।
हर विभाग अपनी उपलब्धियों की झलक दिखाने को तैयार है, स्वास्थ्य में सुधार, शिक्षा में विस्तार, खेलों में चमक और उद्योगों में नई उड़ान। यह जश्न एक सफर का उत्सव है, संघर्ष से सफलता तक का। रांची की गलियां के दीवारों पर बिरसा मुंडा के चित्र, जनजातीय कला की पेंटिंग्स और झारखंड की आत्मा को दर्शाती रंगीन झांकियां। रात ढलते ही पूरा शहर रौशनी से नहा उठता है। उद्यान विभाग ने सड़कों के किनारे लगे पौधों को सजा कर हर मोड़ को त्योहार में बदल दिया है। सरकारी तैयारियों के साथ-साथ आम लोग भी पीछे नहीं। स्कूलों में बच्चे “धरती आबा” के गीत गा रहे हैं, सामाजिक संस्थायें नृत्य-गीत और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं से माहौल को जीवंत कर रही हैं। गांव से लेकर शहर तक, एक ही आवाज “हमारा झारखंड, हमारी शान।”
धरती आबा को नमन
भगवान बिरसा मुंडा, जिन्हें श्रद्धा से धरती आबा कहा जाता है, ने अपने बलिदान से झारखंड की पहचान रची थी।
उनकी जयंती सिर्फ स्मरण नहीं, बल्कि प्रेरणा का पर्व है, एक याद कि यह धरती उन लोगों की है जिन्होंने अपनी आजादी, अपनी अस्मिता और अपनी मिट्टी की खातिर लड़ाई लड़ी। 25 बरस का सफर पूरा कर चुका झारखंड अब नई मंजिलों की ओर बढ़ रहा है। मोरहाबादी की हवाओं में आज वही स्वर गूंज रहा है, “धरती आबा की जय। जय झारखंड।”




