Ranchi : झारखंड के गांवों तक विकास की रफ्तार और तेज करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। गुरुवार को झारखंड मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने राज्य के 25 प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) को विभागीय वाहन सौंपे और हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार की पहचान और छवि काफी हद तक प्रखंड विकास पदाधिकारियों के कामकाज से तय होती है। इसलिये अधिकारियों को संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ जनता के बीच काम करना होगा।
अब गांव-गांव पहुंचेगी योजनाओं की असली निगरानी
मंत्री ने कहा कि कई बार वाहन नहीं होने की वजह से अधिकारी योजनाओं का समय पर निरीक्षण नहीं कर पाते थे। इससे विकास कार्यों की निगरानी और आम लोगों की शिकायतों के समाधान में भी देरी होती थी। अब विभागीय वाहन मिलने से BDO नियमित रूप से क्षेत्र का दौरा कर सकेंगे और योजनाओं की जमीनी हकीकत पर नजर रख पायेंगे। उन्होंने अधिकारियों को टालमटोल की कार्यशैली से बचने और ग्रामीणों की समस्याओं का समय पर समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि यह शुरुआत है। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को विभागीय वाहन उपलब्ध कराये जायें। इसके लिये विभाग को आवश्यक प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिये गये हैं। मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में अधिकारियों के सामने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून का प्रभावी क्रियान्वयन और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होनी चाहिये।
पंचायतें बनें आत्मनिर्भर, बढ़ें आय के स्रोत
15वें वित्त आयोग का जिक्र करते हुये मंत्री ने बताया कि पंचायतों तक 2,250 करोड़ रुपये की राशि पहुंच चुकी है। अब 16वें वित्त आयोग की तैयारियों के बीच पंचायतों को अपने आय के स्रोत बढ़ाने की दिशा में भी गंभीरता से काम करना होगा, ताकि वे और अधिक सक्षम बन सकें। दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि राज्य सरकार डिजिटल पंचायत की अवधारणा को मजबूत कर रही है। इसका उद्देश्य यह है कि ग्रामीणों को जरूरी प्रमाणपत्र, दस्तावेज और सरकारी सेवायें पंचायत स्तर पर ही मिल जायें, ताकि उन्हें बार-बार प्रखंड कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पंचायत सचिवों की कमी सरकार के संज्ञान में है और इसे जल्द दूर करने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास विभाग के सचिव मनोज कुमार, अपर सचिव प्रेरणा दीक्षित, अपर सचिव अरुण कुमार सिंह, संयुक्त सचिव एस. अली खान समेत कई आला अधिकारी मौजूद रहे।

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