Kohramlive : दुनिया भर के बच्चे जिस यूट्यूब पर घंटों आंखें गड़ाये रहते हैं, उसी यूट्यूब के CEO नील मोहन अपने बच्चों को स्क्रीन से दूर रखते हैं। हाल ही में टाइम मैगजीन का ‘CEO ऑफ द ईयर 2025’ चुने गये नील मोहन ने अपने घर के सख्त स्क्रीन नियमों का खुलासा कर सबको चौंका दिया है। नील मोहन का मानना है कि बच्चों को सोशल मीडिया की बेलगाम आजादी खतरनाक हो सकती है। इसलिए उनके घर में वीकडेज़ में स्क्रीन टाइम बेहद सीमित है, वीकेंड पर थोड़ी राहत और रोजमर्रा के साफ और तय नियम हैं। तीन बच्चों के पिता नील मोहन कहते हैं, “पैरेंटिंग में परफेक्शन मुमकिन नहीं, लेकिन संतुलन बेहद जरूरी है।” वह बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगातार नजर रखते हैं।
उनके मुताबिक, ज्यादा स्क्रीन टाइम से नींद बिगड़ती है, ध्यान लगाने की क्षमता घटती है, भावनात्मक विकास प्रभावित होता है, मानसिक स्वास्थ्य कमजोर पड़ता है। नील मोहन अकेले नहीं हैं। बिल गेट्स, मार्क क्यूबन और यूट्यूब की पूर्व CEO सुसान वोज्स्की भी अपने बच्चों के स्क्रीन टाइम पर सख्त सीमाएं तय करते रहे हैं। वहीं, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जोनाथन हैट साफ कहते हैं कि 14 साल से पहले स्मार्टफोन नहीं, 16 साल से पहले सोशल मीडिया नहीं। उनका तर्क है कि मोबाइल बच्चों को ऐसे प्रभावों के सामने लाता है, जिन पर माता-पिता का कंट्रोल नहीं रहता। ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश बन चुका है, जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिये सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया गया है।






