Ranchi (Nandani Singh) : जिगरी दोस्त सलीम को मैंने अपने ही हाथों में दम तोड़ते हुए देखा। कारण था ऐन वक्त पर Oxygen का नहीं मिल पाना। तभी उसी वक्त मन ही मन में ठान लिया कि अल्लाह का करम रहा तो Oxygen Cylinder की कमी नहीं होने दूंगा। रांची में कोई चारा नहीं दिखाई दिया तो पहुंच गये कोलकाता। वहां भी कई मददगार मिले। अब रातभर गाड़ी चलाता हूं। Oxygen लाता हूं। रास्ते में ही रोजा खोलता हूं और सेहरी भी करता हूं। किसी की जान बचाने में जो सुकून मिलता है… वह कोई और काम में नहीं। वक्त और हालात की यह पुकार है कि इंसान इंसान के काम आये। वैसे यह खुदा की मर्जी है… कब किसे क्या देना। रात भर सफर करता हूं। दिन में जहां भी जरूरत होती है वहां तक बिल्कुल मुफ्त में पहुंचाता हूं ऑक्सीजन। रोज 20 से 25 लोगों की सांस की डोर टूटने से बचने की खबर जब मिलती है तो मन को गजब का सुकून मिलता है। यकीन मानिये इससे नेक काम कोई नहीं। इस काम में मेरे बड़े भाई, मुहल्ले के लोग, समाज के लोग और थाना तक मदद कर रहे हैं। आपस में ही चंदा जुटाकर यह सबकुछ हो रहा है।
रांची का बहुत बुरा हाल है, यह किसी से छुपा नहीं। बेड मिल जाता है तो Oxygen नहीं, ऑक्सीजन मिल जाये तो इंजेक्शन नहीं। एक बात बताते हैं… जानियेगा तो माथा ठनक जायेगा। Oxygen Cylinder में लगाने वाला किट यहां अनाप-शनाप दाम में बिक रहा है। यही किट कोलकाता में तीन हजार रुपये में मिल जाता है। इसका ऑरिजिनल दाम है 9 सौ से 11 सौ रुपये। यह कहना है परवेज आलम का। इनका एक छोटा सा कम्प्यूटर का दुकान रोस्पा टावर में है। बड़े भाई मोहम्मद मुद्दसर, इकबाल और तबरेज आलम दिल खोल कर मदद कर रहे हैं। नौजवान एकता कमिटी के साथी दिन रात इसी काम में जुटे हुए हैं। परवेज का इकबाल बुलंद है… आइये सुनते हैं फरिश्ता बनकर सामने आये परवेज और उनके बड़े भाई को…
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