Kohramlive : मोबाइल की स्क्रीन पर उंगलियां चलती रहती हैं और वक्त कब गुजर जाता है, पता ही नहीं चलता। ऑफिस का काम हो, पढ़ाई हो या सोशल मीडिया की दुनिया, स्क्रीन अब जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। लेकिन कई बार दिन ढलते-ढलते सिरदर्द, आंखों में थकान और बेचैनी दस्तक देने लगती है। सवाल यह है कि क्या इसके पीछे सिर्फ मोबाइल की स्क्रीन है? जवाब है, जरूरी नहीं। स्क्रीन टाइम के साथ हमारी बैठने की मुद्रा, नींद, पानी पीने और खाने-पीने की आदतें भी सिरदर्द को बढ़ा सकती हैं।
स्क्रीन देखते समय आंखों पर पड़ता है दबाव
लंबे समय तक स्क्रीन पर लगातार फोकस करने से डिजिटल आई स्ट्रेन हो सकता है। स्क्रीन देखते समय हम सामान्य से कम पलकें झपकाते हैं, जिससे आंखों में सूखापन और थकान महसूस हो सकती है। स्क्रीन की तेज रोशनी, ग्लेयर और बहुत देर तक बिना ब्रेक लगातार देखते रहना भी परेशानी बढ़ा सकता है। कई लोगों की मोबाइल देखने की एक आदत होती है, फोन नीचे और गर्दन लगातार झुकी हुई। इसी तरह लैपटॉप पर घंटों आगे की ओर झुककर बैठना गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर दबाव डाल सकता है। यह मांसपेशीय तनाव कुछ लोगों में तनाव से जुड़े सिरदर्द को बढ़ा सकता है। यानी कई बार सिर दर्द की शिकायत का रास्ता आंखों से नहीं, गर्दन और कंधों के तनाव से होकर भी आता है।
माइग्रेन वालों को ज्यादा संभलकर रहना चाहिये
जिन लोगों को पहले से माइग्रेन की समस्या रहती है, उनके लिये लंबे समय तक स्क्रीन देखना संभावित ट्रिगर हो सकता है। लेकिन कहानी सिर्फ स्क्रीन पर खत्म नहीं होती। तनाव, नींद की कमी, पानी कम पीना और समय पर खाना न खाना भी माइग्रेन को भड़का सकते हैं। इसलिये अगर स्क्रीन इस्तेमाल के बाद बार-बार सिरदर्द होता है, तो यह देखना भी जरूरी है कि उस दिन आपकी नींद, खानपान और पानी पीने की स्थिति कैसी रही।
रात में फोन चलाना पड़ सकता है भारी
बिस्तर पर जाने के बाद फोन पर वीडियो देखना या सोशल मीडिया स्क्रॉल करना कई लोगों की रोज की आदत बन चुका है। समस्या यह है कि इससे सोने का समय आगे खिसक सकता है और नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। नींद पूरी न होने पर अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और मानसिक धुंध यानी ‘ब्रेन फॉग’ जैसी परेशानियां महसूस हो सकती हैं। विशेषज्ञ के मुताबिक सामान्य स्क्रीन इस्तेमाल को सीधे तौर पर मस्तिष्क को नुकसान या याददाश्त कमजोर होने से जोड़ना सही नहीं है। हालांकि लगातार नोटिफिकेशन, बार-बार एक काम से दूसरे काम पर जाना, देर रात तक स्क्रीन देखना और नींद पूरी न होना मानसिक थकान बढ़ा सकते हैं। ऐसे में व्यक्ति को लग सकता है कि उसकी याददाश्त कमजोर हो रही है, जबकि असल समस्या कई बार कम एकाग्रता और थका हुआ दिमाग होती है।
सिरदर्द से बचने के लिये क्या करें?
मोबाइल या कंप्यूटर को पूरी तरह छोड़ देना व्यावहारिक नहीं है। जरूरत है इस्तेमाल के तरीके को बेहतर बनाने की। लंबे समय तक लगातार स्क्रीन न देखें, बीच-बीच में छोटे ब्रेक लें।
आंखों को आराम देने के लिये समय-समय पर स्क्रीन से नजर हटायें। पर्याप्त पानी पियें और खाना समय पर खायें। स्क्रीन को ऐसी ऊंचाई पर रखें कि लगातार गर्दन झुकाकर न देखना पड़े। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने से बचें। सोने से पहले कुछ समय स्क्रीन-फ्री रखने की कोशिश करें। अगर आपको माइग्रेन रहता है, तो अपने संभावित ट्रिगर पहचानने की कोशिश करें। मोबाइल देखने के बाद सिरदर्द होना आम हो सकता है, लेकिन हर बार वजह स्क्रीन ही हो, यह जरूरी नहीं। लगातार तनाव, नींद की कमी, डिहाइड्रेशन, भोजन छोड़ना, गलत पॉश्चर और माइग्रेन जैसी स्थितियां भी भूमिका निभा सकती हैं। स्क्रीन जिंदगी का हिस्सा है, सिरदर्द उसकी कीमत नहीं होना चाहिये। थोड़े-थोड़े ब्रेक, सही पॉश्चर, भरपूर नींद और बेहतर दिनचर्या, इन छोटी आदतों से स्क्रीन के साथ जिंदगी को थोड़ा ज्यादा आरामदायक बनाया जा सकता है।








