spot_img

मीना कुमारी की प्रॉपर्टी का मालिक कौन बनेगा, 34 साल बाद आया फैसला… जानें

Date:

spot_img
spot_img
📖भाषा चुनें और खबर सुनें:
🎙️कोहराम LIVE रेडियो

Kohramlive : मुंबई की झिलमिलाती रातों के नीचे, एक कोना ऐसा भी था जहां चमक-दमक से ज्यादा इंतजार की राख जमी थी। पाली हिल का वही कोना, जहां एक समय मीना कुमारी की खामोशियां और कमाल अमरोही की कलम साथ-साथ चला करती थीं। 1959 की उस दोपहर, जब मीना की आंखों में बॉम्बे का सपना और कमाल के दिल में एक इमारत का ख्वाब था, उन्होंने वो जमीन खरीदी, लगभग 11,000 गज की बंजर जमीन, जिसमें वह एक फिल्मी आशियाना बसाना चाहते थे। लेकिन किसे पता था कि उसी जमीन पर वर्षों बाद किराए के नाम पर बसी कोजीहोम हाउसिंग सोसाइटी उस ख्वाब को अपनी दीवारों में कैद कर लेगी। किराया तय था ₹8,835 मासिक, पर भाव थी करोड़ों की। समय बदला, किराया नहीं।

किरायेदार बढ़े, वफादारी घट गई। और फिर, शुरू हुई एक मूक लड़ाई, जिसमें आवाज सिर्फ कागजों से आती रही।1990 में जब कमाल अमरोही ने लीज खत्म की, उनका इरादा साफ था, विरासत लौटाओ। 1993 में मीना की यादों के सहारे उनके बेटे ताजदार अमरोही ने कोर्ट की चौखट पकड़ी। 34 साल बीत गये, कभी तारीख, कभी तर्क, कभी तोहमत, पर हर बार ताजदार ने मां-बाप की तस्वीर को देखा और बुदबुदाया,“अम्मी… अब्बा… मैं आपका नाम मिटने नहीं दूंगा।” 25 मई वो दिन आया जब कोर्ट ने कहा, “सोसाइटी ने जानबूझकर किराया नहीं चुकाया। अब ये जमीन उसकी नहीं रही।” कोर्ट ने छह महीने की मोहलत दी, और 34 साल के धैर्य को इंसाफ की मोहर दी। खबर है कि, सोसाइटी ने हार नहीं मानी है और अब इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।

spot_img
spot_img
spot_img

Related articles:

रिम्स की हकीकत देख मंत्री भी चौंके और बमक गये… जानें

Ranchi : झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स...

72 घंटे की बेचैनी खत्म, रांची के तीनों लापता बच्चे बिहार में मिले…

Ranchi : कभी-कभी बच्चों की एक छोटी-सी जिद पूरे...

दो दिन में ब्लाइंड म’र्डर का खुलासा, अपने निकले ह’त्यारे…

Chatra : कहते हैं, अपने ही सबसे बड़ा सहारा...

टपकती छत से चमकती छत तक, रजरप्पा थाने की बदली तस्वीर…

Ramgarh(Prince Verma): बरसात की हर बूंद कभी रजरप्पा थाने...