Kohramlive: आस्था और श्रद्धा का महापर्व छठ एक रोज बाद से शुरू हो जायेगा। पवित्र पर्व छठ हर साल के कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होकर सप्तमी तिथि को समाप्त हो जाता है। क्या आप जानते हैं छठ पूजा क्यों मनाया जाता है और सबसे पहले किसने यह त्यौहार किया था? तो आइये जानते हैं इस त्यौहार का महत्व और इतिहास…
माता सीता ने किया था सबसे पहले Chhath Puja का व्रत
पौराणिक कथाओं के अनुसार छठ पूजा का सीधा संबंध त्रेता युग से है। सबसे पहले माता सीता ने यह व्रत किया था। माता सीता मिथिला की रहने वाली थी और यहां प्राचीन काल से सूर्य की उपासना होती है। राम लक्ष्मण सीता जब 14 साल के वनवास से वापस अयोध्या आये थे तब रावण के वध के पाप से मुक्त होने के लिए उन्होंने मुगदल ऋषि को आमंत्रित किया था। उसे समय माता सीता ने मुगदल ऋषि के आश्रम में रहकर 6 दिन तक छठ पूजा का त्योहार किया था तब से इसकी शुरुआत हुई।
कर्ण नें भी किया था छठ पूजा का व्रत
महाभारत के साक्ष्य बताते हैं कि छठ पूजा का त्योहार सूर्यपुत्र कर्ण ने भी किया था। करण सिर्फ सूर्य के पुत्र नहीं थे बल्कि वह भगवान सूर्य के महाभक्त थे और वह कई घंटे तक जल में खड़ा होकर सूर्य को अर्ध्य देते थे। इसके बाद इस त्योहार की शुरुआत हुई। द्रौपदी ने भी महाभारत काल में इस व्रत को किया था।
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बेहद कठिन है छठ का पर्व
छठ पर्व में पवित्रता और निष्ठा का पूरा ख्याल रखा जाता है। 72 घंटे तक निर्जला व्रत करना पड़ता है। 5 को नहाय-खाय है। 6 नवम्बर को खरना और 7 नवम्बर को पहला यानी शाम का अर्ध्य और 8 नवम्बर सुबह के अर्ध्य के साथ पर्व का समापन हो जायेगा।
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(Disclaimer : यह आर्टिकल पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है। कोहरामलाइव डॉट कॉम इसकी सटीकता की पुष्टि नहीं करता)












