Kohramlive : राजनीति का रंग बदल रहा है। कभी मंच, माला और माइक से जनता तक पहुंचने वाली सियासत अब मोबाइल की स्क्रीन पर उतर आई है। इंटरनेट मीडिया के दौर में राजनीतिक संवाद का मैदान बदल चुका है और केंद्र सरकार भी इसकी अहमियत को बखूबी समझ रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खास तौर पर मंत्रियों को इंटरनेट मीडिया पर सक्रिय रहने और युवाओं के साथ डिजिटल संवाद मजबूत करने पर जोर दिया है।
मंत्रियों के हाथ पहुंचा बंद लिफाफा
बुधवार को कैबिनेट बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्रियों को एक-एक बंद लिफाफा सौंपा गया। बताया गया कि इसमें इंटरनेट मीडिया पर उनकी सक्रियता का पूरा लेखा-जोखा शामिल है। रिपोर्ट में 1 मई से 15 अगस्त तक चार प्रमुख प्लेटफॉर्म, फेसबुक, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन और एक्स, पर मंत्रियों की गतिविधियों का आकलन किया गया है। सिर्फ पोस्ट कितनी की गईं, इतना ही नहीं, रिपोर्ट में मुद्दों पर मंत्रियों की सक्रियता, उनके रुख और टिप्पणियों के साथ-साथ उनकी पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रिया को भी आधार बनाया गया है। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में मंत्रियों की रैंकिंग भी की गई है। यानी किस मंत्री की डिजिटल मौजूदगी कितनी प्रभावी रही, किसकी पोस्ट को ज्यादा प्रतिक्रिया मिली और कौन अपने समकक्षों से आगे या पीछे रहा, इसका भी हिसाब लगाया गया। दिलचस्प बात यह है कि रिपोर्ट में मंत्रियों की तुलना उनके समकक्षों के साथ-साथ विपक्षी नेताओं की डिजिटल सक्रियता से भी किये जाने की जानकारी है।
PM मोदी ने समझाया डिजिटल संवाद का महत्व
प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों को इंटरनेट मीडिया के महत्व को गंभीरता से लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी बेहद जागरूक है और लगातार इंटरनेट मीडिया पर सक्रिय रहती है। ऐसे में सरकार की ओर से जारी होने वाली सूचना हो या किसी मुद्दे पर राजनीतिक विमर्श—युवा तक पहुंचने का सबसे तेज रास्ता अब डिजिटल प्लेटफॉर्म बन चुका है।
भ्रामक जानकारी के दौर में ‘अपना पक्ष’ जरूरी
सरकार की चिंता सिर्फ डिजिटल लोकप्रियता तक सीमित नहीं है। इंटरनेट मीडिया पर तेजी से फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं को लेकर भी मंत्रियों को सक्रिय रहने का संदेश दिया गया।मंत्रियों से कहा गया कि वे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सही तथ्यों के साथ अपनी बात रखें, ताकि गलत या भ्रामक जानकारी के बीच सरकार का पक्ष भी सीधे जनता तक पहुंच सके। जब बात किसी मंत्री के आधिकारिक अकाउंट से आती है, तो उसकी विश्वसनीयता आम राजनीतिक पोस्ट की तुलना में अधिक मानी जा सकती है।
इंस्टा पर भी बढ़ानी होगी रफ्तार
प्रधानमंत्री मोदी पहले भी मंत्रियों को विशेष रूप से इंस्टाग्राम पर सक्रियता बढ़ाने की सलाह दे चुके हैं। खुद प्रधानमंत्री भी इस प्लेटफॉर्म के जरिये युवाओं और खासकर जेन-जी से संवाद करते रहे हैं। यानी संदेश साफ है कि अब सिर्फ संसद के भीतर बोलना काफी नहीं, सोशल मीडिया की टाइमलाइन पर भी मौजूद रहना होगा।








