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हीमोग्लोबिन बढ़ाने का बेहतर तरीका… जानें

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Kohramlive : हीमोग्लोबिन शरीर के ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है। अगर ब्लड टेस्ट में इसका स्तर कम आया है, तो इसे सिर्फ खान-पान की छोटी समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिये। एनीमिया के कई कारण हो सकते हैं, आयरन की कमी के अलावा फोलेट या विटामिन B12 की कमी, संक्रमण, पुरानी बीमारी, रक्तस्राव और कुछ आनुवंशिक स्थितियां भी इसकी वजह हो सकती हैं। चुकंदर को संतुलित डाइट में शामिल किया जा सकता है। इसमें फोलेट समेत कई पोषक तत्व होते हैं, लेकिन सिर्फ चुकंदर का जूस पीने से कम हीमोग्लोबिन तेजी से बढ़ जायेगा, ऐसा मानना सही नहीं है। अगर आयरन की कमी है, तो भोजन में पर्याप्त आयरन लेना और उसकी शरीर में बेहतर अवशोषण क्षमता सुनिश्चित करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। चुकंदर का जूस बनाने के लिये एक ताजा चुकंदर धोकर छीलें और छोटे टुकड़ों में काट लें। ब्लेंडर या जूसर में थोड़े पानी के साथ तैयार करें। स्वाद के लिये नींबू का रस मिलाया जा सकता है। नींबू और दूसरे विटामिन-C युक्त फल-सब्जियां पौधों से मिलने वाले आयरन के अवशोषण में मदद कर सकती हैं। जूस में अतिरिक्त चीनी डालने से बचना बेहतर है।

हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिये थाली में क्या रखें?

सिर्फ एक जूस पर निर्भर रहने के बजाय भोजन में अलग-अलग आयरन और दूसरे जरूरी पोषक तत्वों के स्रोत शामिल करें। शाकाहारी विकल्पों में, मसूर, चना, राजमा और अन्य दालें, बीन्स, गहरे हरे पत्तेदार साग, तिल और अन्य बीज, आयरन-फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ। वहीं, मांसाहारी भोजन लेने वालों के लिये मांस, मछली, चिकन। WHO भी एनीमिया की रोकथाम और प्रबंधन में आयरन, फोलेट, विटामिन B12 और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर विविध आहार पर जोर देता है।

आयरन के साथ विटामिन-C की दोस्ती जरूरी

दाल, चना, राजमा या हरी सब्जियों जैसे आयरन वाले भोजन के साथ नींबू, आंवला, अमरूद, संतरा या अन्य विटामिन-C युक्त फल-सब्जियां लेना फायदेमंद हो सकता है। विटामिन-C खासकर पौधों से मिलने वाले नॉन-हीम आयरन के अवशोषण को बढ़ाने में मदद करता है। आयरन की कमी होने पर खाने के साथ या तुरंत बाद चाय-कॉफी पीने की आदत पर ध्यान देना चाहिये। इनमें मौजूद कुछ पॉलीफेनॉल आयरन के अवशोषण में बाधा डाल सकते हैं। WHO के अनुसार आयरन वाले भोजन से चाय-कॉफी को अलग समय पर लेना बेहतर है, एक व्यावहारिक तरीका भोजन के करीब 1–2 घंटे बाद इन्हें लेना है।

ये लक्षण दिखें तो जांच करायें

लगातार, थकान और कमजोरी, चक्कर या सिर हल्का लगना, सिरदर्द, थोड़ा काम करने पर सांस फूलना, हाथ-पैर ठंडे रहना, जैसे लक्षण हों तो डॉक्टर से सलाह लेकर हीमोग्लोबिन की जांच कराना उचित है। ये लक्षण केवल एनीमिया के कारण ही हों, यह जरूरी नहीं है।

हीमोग्लोबिन कम आया तो वजह जानना सबसे जरूरी

कम हीमोग्लोबिन का मतलब हमेशा सिर्फ आयरन की कमी नहीं होता। भारी मासिक रक्तस्राव, गर्भावस्था, संक्रमण, पुरानी बीमारियां, पोषक तत्वों की कमी या आनुवंशिक रक्त संबंधी विकार भी कारण हो सकते हैं। इसलिये लगातार कम रिपोर्ट आने पर केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय जांच जरूरी है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार आयरन या दूसरे सप्लीमेंट की सलाह दे सकते हैं। बिना जांच और चिकित्सकीय सलाह के लंबे समय तक आयरन की गोलियां लेना सही तरीका नहीं है, क्योंकि इलाज एनीमिया के वास्तविक कारण पर निर्भर करता है। याद रखें—चुकंदर की एक गिलास जूस से ज्यादा ताकतवर है रोज की संतुलित थाली। आयरन, विटामिन-C, फोलेट, B12 और पर्याप्त प्रोटीन का संतुलन ही शरीर को बेहतर पोषण देने की असली कुंजी है।

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