UP : आगरा की सुबह उस रोज कुछ अलग थी। यमुना की शांत लहरें अपने भीतर कोई रहस्य छुपाये बैठी थीं। सूरज अभी पूरी तरह निकला भी नहीं था, जब सिकंदराबाद थाना क्षेत्र के नगला नाथू गांव की छह कोमल कलिया, खिलती मुस्कान, मासूम दिव्या, चंचल संध्या, शरारती नैना, सौम्य शिवानी और नन्ही सोनम जीवन के सबसे निश्छल पल को जीने नदी की ओर बढ़ीं। मुस्कान, दिव्या और संध्या सगी बहनें थी। बाकी तीनों मौसी और चचेरी बहनें थी। हंसी-ठिठोली, रीलें और सेल्फियां जैसे जिंदगी की किताब में नये अध्याय के रंग भरे जा रहे हों। किसी को क्या पता था कि ये तस्वीरें, ये वीडियो आखिरी यादें बन जायेंगे।

मुस्कान… उस घर की सबसे बड़ी बेटी। जिसकी मेहंदी के रंग की बात हो रही थी, जिसकी चूड़ियों की खनक गूंजने वाली थी आंगन में। दादा की आंखों में पोती की विदाई का सपना था। लेकिन अब… उसी आंगन में शहनाई की जगह सन्नाटा था, और बारात की जगह छह अर्थियां पहुंचीं। बहनों के डूबने की खबर लेकर जब भाई दीपेश की चीखें खेतों में गूंजती रहीं, तब गांव की मिट्टी भी कांप उठी। ग्रामीणों ने नदी में छलांग लगाई, पर नियति का लेख पहले ही लिखा जा चुका था। चार को लहरें निगल चुकी थीं, दो ने अस्पताल की चादरों पर अंतिम सांस ली।

उस दिन न तो किसी ने खाना खाया, न किसी ने बात की। पिता सुरेश चंद्र और मां कांता के नंगे पांव दौड़ते कदम, उनकी चीखें और सूनी आंखें इस बात की गवाही दे रही थीं। एक साथ छह चिरागों का बुझ जाना, किसी एक घर का नहीं, पूरी मानवीय संवेदना का दुख है।
CM योगी ने 4-4 लाख मुआवजे की घोषणा की। अफसर आए, समझाया, पोस्टमार्टम की बात हुई, पर उस मां-बाप की आंखों में सिर्फ एक सवाल था “किस्मत से कौन सा अपराध हुआ था, जो एक ही दिन में छह बेटियों को छीन लिया गया।”

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