Kohramlive : जेब में रखे-रखे मुड़ जाने वाला, बारिश की बूंदों में भीगकर कमजोर पड़ जाने वाला और बार-बार हाथ बदलने से घिस जाने वाला रुपया अब एक नये सफर पर निकलने की तैयारी में है। देश की करेंसी में एक बड़ा बदलाव दस्तक दे रहा है। आने वाले समय में छोटे नोट कागज के नहीं, बल्कि मजबूत प्लास्टिक यानी पॉलिमर से बने नजर आ सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 अगस्त को संकेत दिये हैं कि अगर फील्ड ट्रायल RBI की योजना के मुताबिक सफल रहा, तो अप्रैल 2027 से भारत में प्लास्टिक नोटों की शुरुआत हो सकती है।
छोटे नोटों को मिलेगी लंबी उम्र
गांव की छोटी दुकानों से लेकर शहर के बड़े बाजारों तक, 10 और 20 रुपये के नोट रोजाना हजारों हाथों से गुजरते हैं। चाय की दुकान, सब्जी का ठेला, बस का किराया या छोटी खरीदारी, इन नोटों की जिंदगी सबसे ज्यादा भागदौड़ वाली होती है। RBI का मानना है कि प्लास्टिक यानी पॉलिमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा टिकाऊ होते हैं। ये जल्दी फटते नहीं हैं और लंबे समय तक इस्तेमाल किये जा सकते हैं।
पहले आयेंगे 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोट
केंद्र सरकार ने RBI के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत प्रयोग के तौर पर 10 रुपये और 20 रुपये के करीब एक-एक अरब प्लास्टिक नोट जारी किये जायेंगे। अगर यह परीक्षण सफल रहता है तो आने वाले दिनों में देशभर में इन नोटों को उतारने पर फैसला लिया जा सकता है। सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि प्लास्टिक नोट आने के बाद मौजूदा कागज के नोट अचानक बंद नहीं होंगे। दोनों तरह के नोट कुछ समय तक साथ-साथ चलेंगे। भारत में प्लास्टिक करेंसी शुरू करने की चर्चा करीब एक दशक पहले शुरू हुई थी। लेकिन कई कारणों से यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई। अब एक बार फिर इस दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
महंगा जरूर, लेकिन फायदा लंबे समय का
फिलहाल भारत में ज्यादातर नोट सूती कागज पर छापे जाते हैं। वहीं पॉलिमर नोट मजबूत प्लास्टिक सामग्री से तैयार होते हैं। इन्हें बनाने की शुरुआती लागत ज्यादा होती है, लेकिन इनकी उम्र लंबी होने से लंबे समय में फायदा मिलने की उम्मीद है। दुनिया के कई देश पहले से ही पॉलिमर नोटों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया वर्ष 1988 में प्लास्टिक नोट शुरू करने वाला पहला देश बना था। इसके बाद ब्रिटेन, कनाडा, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और वियतनाम समेत 60 से ज्यादा देशों ने इसे अपनाया।















