Dumka : दुमका के पहाड़ियों के साये में मोहब्बतें भी चुपचाप करवटें लेती हैं और रिश्तों के नाम पर खंजर चलते हैं। बीते 7 जून की सुबह, जरूवाडीह के उस वीराने में जब एक बच्चा गाय खोजते-खोजते मैदान के गोबर के ढेर तक पहुंचा, तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि वहां मौत अपने पूरे सबूतों के साथ दबी होगी। जब पुलिस आई, तो सड़े हुये कच्चे गोबर के नीचे से एक अधजला, अधसड़ा शव एक औरत का निकला। शुरू में कोई नहीं पहचान पाया, लेकिन फिर उसकी उंगलियों में पड़ी बिच्छुये, औरतों की पहचान में सबसे पुरानी गवाही बन गये। वो थी 28 साल की सुकुरमनी सोरेन। रंगाबांध गांव में रहती थी। वह दो बच्चों की मां थी। एक आदिवासी औरत, जो महीनों तक अपने मजदूर पति की गैरहाजिरी में, देवर के साथ वक्त काटने लगी थी। उसका पति परदेश में काम करता है। करीब 15 दिन पहले अपने घर आया है। लगभग 29 साल का देवर मंगल मुर्मू पिछले एक साल से दोनों के बीच रिश्ते की सरहदें मिट चुकी थीं। गांव वालों की फुसफुसाहट और बच्चों की मासूम नजरों के बीच, ये रिश्ता अब भड़कीली आग बन चुका था।लेकिन सच्चाई यह थी कि सुकुरमनी अब भी एक मां थी और मंगल सिर्फ एक आशिक़, जिसकी जिद, उसके प्यार से कहीं बड़ी थी।
बीते 4 जून को मंगल ने उसे फोन कर बुलाया, “चलो दूर कहीं, नई जिंदगी शुरू करते हैं।” लेकिन जब सुकुरमनी ने इंकार किया, “मेरे बच्चे, मेरा घर, मैं नहीं जा सकती मंगल।” तो उसका चेहरा एक प्रेमी से बदलकर दरिंदा बन गया। भाभी की थप्पड़ ने उसे अंदर तक हिला दिया था, और उसने वहीं पड़ा पत्थर उठाया और एक ही वार में मोहब्बत की कहानी खत्म कर दी। शरीर को घसीटकर गोबर के ढेर में फेंक दिया गया। बीते 11 जून को पुलिस ने मंगल को उठा लिया। कड़ाई से पूछताछ हुई, तो वो टूट गया। उसकी निशानदेही पर सुकुरमनी का पर्स, टूटी चप्पल और वो पत्थर, जिस पर इश्क़ ने दम तोड़ा, उसे जब्त कर लिया। ये सनसनीखेज वारदात दुमका के जरमुंडी थाना क्षेत्र के जरूवाडीह गांव से सामने आई है। इस बात का खुलासा आज दुमका के SP पीतांबर सिंह खेरवार ने मीडिया के सामने किया।












