Ranchi(Kuldeep Tiwari) : सरकार का सपना है कि गांव के बच्चे भी शहरों जैसी सुविधाओं के बीच पढ़ें, आगे बढ़ें और अपने सपनों को पंख दें। इसी उम्मीद से आदिवासी बहुल क्षेत्र ओरमांझी के पिस्का के राजकीय मध्य विद्यालय को पीएम श्री उत्क्रमित उच्च विद्यालय का दर्जा मिला। विकास के नाम पर हर साल लाखों रुपये भी खर्च किये जा रहे हैं। लेकिन जब स्कूल की चौखट पर पहुंचते हैं तो तस्वीर कुछ और ही कहानी सुनाती है। जर्जर भवन, टूटा फर्श, खराब चापानल, चारदीवारी का अभाव और शिक्षकों की कमी के बीच पढ़ाई का जिम्मा कई बार खुद बच्चों को उठाना पड़ रहा है। विद्यालय दो भवनों में संचालित होता है। पुराना मध्य विद्यालय भवन काफी जर्जर स्थिति में है। फर्श का प्लास्टर पूरी तरह टूटकर धूल में बदल चुका है। कई जगहों पर बदबू की शिकायत भी सामने आती है। इसी भवन में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों की पढ़ाई होती है। स्थिति यह है कि एक ही कमरे में कई कक्षाओं को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है। केजी से लेकर पांचवीं तक के बच्चों को भी सीमित कमरों और संसाधनों में पढ़ाने की मजबूरी है। कक्षा एक से आठ तक के लिये महज पांच शिक्षक बताये गये हैं। वहीं नौवीं और दसवीं कक्षा के लिए 11 शिक्षक पदस्थापित हैं। विद्यालय में कुल 18 शिक्षक बताये गये हैं, जिनमें एक शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर दूसरे स्थान पर हैं। शुक्रवार को स्कूल में शिक्षकों की कमी का असर सीधे कक्षा में दिखाई दिया। कुछ बच्चे ही अपने साथी विद्यार्थियों को पढ़ाते नजर आये। स्कूल में पेयजल की व्यवस्था भी चिंता बढ़ाने वाली है। बच्चों के लिये लगा एकमात्र चापानल खराब है। आरोप है कि जब कभी पानी आता भी है तो उसमें बदबू रहती है। नतीजा यह है कि मध्यान्ह भोजन तैयार करने के लिये रसोइयों को दूर से पानी ढोकर लाना पड़ता है। विद्यालय में चारदीवारी तक नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, स्कूल की छुट्टी होते ही परिसर में नशेड़ियों और जुआ खेलने वालों का जमावड़ा लगने की शिकायत रहती है।








