UP : कानपुर के कल्याणपुर की सड़कें अभी नींद से जगी भी नहीं थीं कि किस्मत ने एक घर की रौशनी छीन ली। नर्सिंग की छात्रा 19 साल की अलशिफा को उसका छोटा भाई 15 साल का तौहीद बहन को स्टेशन तक छोड़ने जा रहा था। सुबह के 5 बजकर 5 मिनट पर अलशिफा ने स्कूटी स्टार्ट की थी। 5.20 की ट्रेन पकड़नी थी, परीक्षा देने जाना था। लेकिन 5.15 पर किस्मत ने उनकी परीक्षा ले ली और केस्को सब स्टेशन के पास एक तेज रफ्तार लोडर, जो गलत दिशा से आया था, उनकी स्कूटी को रौंदता चला गया। दोनों भाई-बहन उछल कर सड़क पर गिरे और वहीं पौने घंटे तक तड़पते रहे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उस राह से गुजरते लोगों का दिल नहीं पसीजा। किसी ने उन्हें उठाने की जहमत नहीं की। हां, मोबाइल जरूर निकले। वीडियो बने, रील्स बने, लेकिन इंसानियत नदारद रही। 100 कदम दूर नर्सिंग होम था, पर किसी ने वहां तक ले जाने का जिम्मा नहीं लिया। न पुलिस को फोन किया, न एम्बुलेंस को। शायद हर किसी को डर था “मामला झंझट का न बन जाये”। कुछ देर बाद पुलिस आई। बेतरह जख्मी दोनों भाई-बहन को अस्पताल ले जाया गया। लेकिन तब तक सब खत्म हो चुका था। मसवानपुर का वह घर जहां जब एक साथ भाई-बहन की लाशें लौटी तो हर किसी का कलेजा दरक गया। जहां कभी सुबह अलशिफा का हंसता चेहरा देखा था, वहां अब कशिश की चीखें थीं, “अब अप्पी किसे कहूंगी?” मां, खुशनुमा बानो, बेसुध पड़ी थी। बाप, मो. शकील, जैसे वक्त से पहले बूढ़े हो गये। वहीं, बहनों की आंखों में, वो सपने तैरते रहे जो अलशिफा के साथ दफन हो गये। मो. शकील की IIT गेट के नजदीक दुकान है। बड़ी बेटी अलशिफा बिल्हौर के आरौल स्थित निजी कॉलेज में BSC नर्सिंग की छात्रा थी।







