Ranchi(Akhilesh) : राजधानी रांची की धरती पर एक गांव ऐसा भी है, जहां काले बादल किसी उत्सव का नहीं, बल्कि अनहोनी का संदेश लेकर आते हैं। नामकुम प्रखंड की लाली पंचायत का बजरमारा गांव बरसात की पहली बूंद गिरने से पहले ही सिमट जाता है। यहां बारिश का मतलब केवल पानी नहीं, बल्कि आसमान से बरसती मौत का खतरा है। गर्मी से बेहाल लोग जहां झमाझम बारिश की दुआ करते हैं, वहीं बजरमारा गांव के सैकड़ों ग्रामीण मानसून का नाम सुनते ही सहम उठते हैं। वजह है हर साल होने वाला भीषण वज्रपात, जिसने इस गांव से कई अपनों को छीन लिया, कई लोगों को घायल किया और कई बेजुबान मवेशियों की जान ले ली। चारों तरफ पहाड़ और घने जंगलों से घिरे इस गांव में जैसे ही आसमान पर बादल मंडराते हैं, खेतों और जंगलों में काम कर रहे लोग सब कुछ छोड़कर घर की ओर भागने लगते हैं। हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल रहता है, इस बार बिजली कहां गिरेगी? बजरमारा में बारिश शुरू होते ही पूरा गांव जैसे थम जाता है। दरवाजे और खिड़कियां बंद हो जाती हैं। गलियां वीरान हो जाती हैं। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं घरों में दुबक जाते हैं। डर इतना गहरा है कि लोग दरवाजा या छोटी-सी खिड़की हल्की खोलकर बाहर झांकते हैं कि मौसम साफ हुआ या नहीं। बारिश थमने के बाद भी घंटों तक कोई बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। जब एक व्यक्ति साहस करके बाहर आता है, तब जाकर दूसरे घरों के लोग भी बाहर निकलते हैं। गांव वालों का कहना है कि बरसात के दिनों में उनके अपने नाते-रिश्तेदार भी यहां आने से बचते हैं। कई परिवार तो पूरे मानसून के दौरान रिश्तेदारों के यहां चले जाते हैं। ग्रामीण कहते हैं, “कब किस पर बिजली गिर जाये, कोई नहीं जानता।”यही डर हर बारिश के साथ उनके दिलों में उतर आता है। मौसम बिगड़ते ही बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया जाता है। खेतों और जंगलों में चर रहे मवेशियों को भी जल्द-से-जल्द घर ले आया जाता है। इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जानवरों की सुरक्षा भी ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता बन जाती है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि चारों ओर चट्टानी पहाड़ और ऊंचे-ऊंचे पेड़ों से घिरे इस इलाके में वर्षों से अत्यधिक वज्रपात होता रहा है। कई परिवारों ने अपने लोगों को खोया, कई मवेशी मारे गये। लगातार पड़ती इस प्राकृतिक मार को देखते हुये पूर्वजों ने गांव का नाम ही बजरमारा रख दिया। सुनें क्या बोले बजरमारा गांव के लोग…
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