Ranchi (Rajesh Singh) : छठी मईया की महिमा निराली। उन्हीं की कृपा से अपने वतन वापस लौट रहा हूं। अपने देश में जाकर मरते दम तक छठ करूंगा और छठी मईया की महिमा के बारे में सबको बताऊंगा। यह कहना था जेल से बाहर निकले नाइजीरियन कैदी युगवुम सिनाची ओनिया और सोलोमोन अलीग्वियू का। दोनों मुजफ्फरपुर के शहीद खुदीराम बोस सेंट्रल जेल में बंद थे। जेल के अंदर ही कई कैदियों से छठ मईया की महिमा के बारे में सुना। मन में आया और ठान लिया छठ करने को। युगवुम सिनाची ओनिया के अनुरोध पर जेल प्रशासन ने उसे छठ पूजा संबंधी सारी सामग्री उपलब्ध कराई। पूरी आस्था और विधि-विधान से छठ किया। जब हाईकोर्ट का आदेश आया तो उसके मुख से निकला, छठ मईया की महिमा निराली। मुजफ्फरपुर से दोनों कोलकाता पहुंचे हैं। वहां से अनुमति मिलते ही नाईजीरिया के लिए निकल पड़ेंगे।
सूत्रों के अनुसार 14 मार्च 2019 को सुबह के साढ़े 6 बजे अमर ज्योति बस नंबर BR-06PA-7167 में दो नाईजीरियन नागरिक बैठे थे। बस सीतामढ़ी से पटना जा रही थी। रून्नी सैदपुर के बीडीओ को संदेह हुआ। दोनों से जब पूछताछ की गई तो… उनके पास न तो पासपोर्ट, ना ही वीजा। वहीं कोई अन्य कागजात भी नहीं दिखा पाए। बीडीओ के बयान पर रून्नी सैदपुर थाना में विदेशी अधिनियम उल्लंघन के तहत केस (कांड संख्या 103/19) दर्ज किया गया। जिसके बाद दोनों को सीतामढ़ी जेल भेज दिया गया। कुछ माह पहले दोनों को मुजफ्फरपुर जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। तब से दोनों इसी जेल में थे। लगभग पौने 3 साल दोनों जेल में रहे। इस दौरान हिंदी बोलना और समझना भी जान गये। टूटी-फूटी हिंदी बोल भी लेते हैं।
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