Ranchi (Neeraj Thakur / Pawan Thakur) : झारखंड, बिहार, वेस्ट बंगाल और ओडिशा में माओवादियों के जनक प्रशांत बोस उर्फ किशन दा उर्फ मनीष उर्फ बूढ़ा ने पुलिस के सामने जुबां खोली तो पुलिस उन्हें घंटों निहारती और सुनती रह गई। शायद यही वजह है कि राज्य के पुलिस मुखिया यानी डीजीपी नीरज सिन्हा ने कहा… उन्हें महासागर मिला है। धनबाद के तोपचांची में दीपावली के समय 15 पुलिसकर्मियों को एक साथ मार गिराने का मुख्य सूत्रधार आज उनके गिरफ्त में है। ये वही प्रशांत बोस है जिसने झारखंड में अबतक 35 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की शहीद गाथा लिखी है। अभी पूरी तरह से इसकी जीवन कुंडली खंगालनी बाकी है। इसमें समय लगेगा। पर यह ऐतिहासिक पल है कि एक करोड़ के इनामी पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस और उसकी पत्नी शीला मरांडी उर्फ शीला दी ने कई राज उगले हैं। कई राज्यों की पुलिस फाइल इनकी नक्सली गाथा से भरे पड़े हैं। ज्यादातर मामले संगीन हैं। संगठन में प्रशांत बोस के कद का कोई पैमाना नहीं। जो आपने नहीं सोचा होगा, उससे कहीं ज्यादा इनकी हस्ती संगठन में मानी जाती थी। 60 के दशक में प्रशांत बोस कालेज में थे। पढ़ाई के दौरान ही कोलकाता के नक्सली संगठन के मजदूर यूनियन संगठन से जुड़ गये। संगठन के मकसद से प्रभावित हो कर प्रशांत बोस MCCI के संस्थापक कन्हाई चटर्जी से नाता जोड़ लिया। इन्हें गिरिडीह, धनबाद, बोकारो एवं हजारीबाग के इलाके से जमींदारी प्रथा, सूदखोरी और शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद करने की जिम्मेदारी दी गई।
रणवीर सेना और ब्रह्मर्षि सेना से भी लोहा लिया
वहीं बिहार के जहानबाद, भोजपुर और गया में सक्रिय रणवीर सेना और ब्रह्मर्षि सेना से भी लोहा लिया। वर्ष 2000 में झारखंड अगल होने के बाद इन्हें झारखंड में संगठन को मजबूत करने के लिए भेजा गया। इससे पहले प्रशांत बोस वर्ष 1974 में गिरफ्तार कर लिये गये थे। तब उन्हें हजारीबाग जेल में रखा गया था। 1978 में जेल से निकलने के बाद खुद को संगठन के नाम झोंक दिया। 2004 में MCCI का PWG के साथ विलय हो गया। प्रशांत बोस ने सारंडा जंगल को अपना पनाह स्थल बनाया। ताबड़तोड़ एक से बढ़कर एक नक्सली वारदातों को अंजाम देकर प्रशांत बोस अपने मंसूबे और ताकत दिखा संगठन का थिंक टैंक बन गये।इनकी हुकूमत झारखंड के कई इलाकों में चलती थी। इनके एक इशारे पर जान का बाजी लड़ाने वालों की लंबी फेहरिश्त बन गई। वहीं उनकी जीवन संगीनी बनी शीला मरांडी उर्फ शीला दी कमजोर नहीं थी। हर मोर्चे पर वह अपने पति का साथ देती रही। शीला मंरांडी के नाम भी झारखंड पुलिस फाइल में कुल 13 नक्सली वारदात से संबंधित मामले दर्ज हैं।
नाम सुनते हीं कांप उठते थे उनके दुश्मन
प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का नाम सुनते ही कांप उठते थे उनके दुश्मन। झारखंड पुलिस की तो नींद हराम हो गई थी। सारंडा में पहली बार झारखंड पुलिस तक घुसने की हिम्मत की, जब डीजीपी टीपी सिन्हा हुआ करते थे। तब महिला IPS अधिकारी मंजरी जरुहार और सुमन गुप्ता पहली दफा सारंडा पहाड़ पर चढ़ी थीं। अबकी बार डीजीपी बने नीरज सिन्हा ने ऐसा जाल बिछाया कि बड़े ही आसान तरीके से एक करोड़ के इनामी प्रशांत बोस, उनकी पत्नी शीला मरांडी, साथी बिरेंद्र हांसदा उर्फ जीतेंद्र, राजू टुडू निखिल उर्फ बाजू, कृष्णा हांसदा उर्फ हेवन और गुरूचरण बोदरा पुलिस गिरफ्त में आ गये। नीरज सिन्हा जब डीजीपी बने तब उन्होंने कोई लंबी-चौड़ी बातें नहीं कही। बेहद शांत और धीर-गंभीर नीरज सिन्हा ने जब अपना तेवर दिखाना शुरू किया तो आम से लेकर खास तक को चौंकाते चले गये। कई बड़े नक्सलियों, उग्रवादियों और अपराधियों को मार गिराया गया। कई सलाखों के पीछे डाल दिये गये। कई छोटे-बड़े संगठित आपराधिक गिरोह के कमर की रीढ की हड्डी तोड़ कर रख दी। माफिया तंत्र भी नतमस्तक है। उनकी एक ही कोशिश है कि आम जनता का भरोसा पुलिस जीते। पुलिस अपने बर्ताव से अपना चेहरा बदले।
वहीं आईजी ऑपरेशन अमोल वेणुकांत होमकर नक्सली अभियान के मुख्य नायक के रूप में उभर कर सामने आये हैं। हर किसी का दुखड़ा सुन उसे दूर करना हर दिल अजीज होमकर की पहचान बन गई है। सुनें क्या बोले डीजीपी नीरज सिन्हा और आई अभियान होमकर…






