Kohramlive Desk: पानी फल से हम सब परिचित हैं। यह पानी में पैदा होता है, इसलिए इसका नाम पानी फल पड़ गया। अंग्रेजी में वाटर हायसिंथ (Water hyacinth)। इसे कहीं-कहीं सिंघाडा़ा भी कहा जाता है। इस फल का सेहत के लिए बड़ा महत्व है। आयुर्वेद विशेषज्ञों का तो यहां तक कहना है कि दिल की बीमारियों के लिए यह एक औषधि जैसा काम करता है। इसके और भी फायदे हैं। जाड़े में सिंघाड़ा खाने से हम कई तरह की बीमारियों से बच सकते हैं। यह गले में खरास, थकावट, सूजन और ब्रोंकाइटिस में फायदेमंद है। खाली पेट इसका सेवन ज्यादा फायदेमंद माना गया है। सिंघाड़ा के आटे में उच्च रक्तचाप के जोखिम को कम करने की ताकत है। यह पाचन तंत्र के लिए बढ़िया है, साथ ही बुढ़ापे में होने वाली बीमारियों से भी बचाता है। प्रेग्नेंसी में सिंघाड़ा खाने से मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं। ये गैस, एसिडिटी, कब्ज और अपच जैसी दिक्कतों से राहत देता है। सिंघाड़े का आटा दूध में मिलाकर पीने से गले की समस्याओं में फायदा होता है।
पाए जातें हैं ये पोषक तत्व
सिंघाड़ा में विटामिन ए, सिट्रिक एसिड, फॉस्फोरस, विटामिन सी, मैंगनीज, थायमिन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, आयोडीन और मैग्नीशियम पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है, ये सभी पोषक तत्व सेहत के लिए फायदेमंद हैं। इसमें विटामिन ए, सिट्रिक एसिड, फॉस्फोरस, विटामिन सी, मैंगनीज, थायमिन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, आयोडीन और मैग्नीशियम पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है, इन तत्वों के होने से सिंघाड़ा हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माना गया है।
इस प्रकार करें पानी फल का उपयोग
हम सिंघाड़े को कच्चा भी खा सकते हैं। इसके अलावा इसे उबाल कर नमक के साथ भी खाया जाता है। जब सिंघाड़े का सीजन नहीं होता, तब भी इसके आटे का इस्तेमाल हलवा वगैरह बनाने में किया जाता है।
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