UP : जब वो 9 साल का था, तभी उसका किडनैप कर लिया गया था। एक व्यापारी के फार्म हाउस में उसे गुलाम बना दिया गया था। बाहर की दुनिया से कटे रहे भीम सिंह गुलामी की जिंदगी से मुक्त होकर पुलिस तक पहुंचा। करीब 31 साल तक वह गुलामी की जंजीर से बंधा रहा। उसने पुलिस को बताया कि जिस फार्म हाउस में उसे गुलाम बना कर रखा गया था, वहीं पर आये एक मवेशी व्यापारी ने उसे बचाया। सारा दुखड़ा सुनने के बाद इस व्यापारी को यकीन हो गया था कि उसका घर गाजियाबाद में ही कहीं है। व्यापारी ने भीम सिंह की सारी कहानी एक कागज पर लिख उसे थमा दिया और कहा कि वो पुलिस और मीडिया के पास जायें। भीम सिंह किसी तरह एक थाने में पहुंचे और पुलिस को बीती सारी बातें बता दी। भीम सिंह का अपहरण साल 1993 में किया गया था। पुलिस ने मशक्कत कर भीम सिंह के परिवार का पता लगा लिया। जब उसकी मां थाना पहुंची तो अपने बेटे भीम को नहीं पहचान पाई, पर बेटे ने मां को पहचान लिया। मां ने अपने बेटे के बदन में रहे निशान के बारे में बताया तो जांच में यह सही निकला। इसके बाद मां को यकीन हो गया कि यह उसका बिछड़ा बेटा भीम सिंह ही है। कुछ नाते-रिश्तेदारों ने DNA टेस्ट कराने पर जोर दिया।
गुलामी की यातनाएं
भीम सिंह ने पुलिस और परिवार को बताया कि उसे अगवा कर एक टेम्पो से ले जाया गया, फिर एक ट्रक से जैसलमेर ले जाया गया। उसे यह पता नहीं कि जैसलमेर में उसे किसके यहां और कहां गुलाम बना कर रखा गया था। बस उसे इतना याद है कि जिस शख्स ने उसे बंधक बना रखा था, उसका नाम साई राम था। उससे दिन भर मवेशी की देखभाल करने का काम लिया जाता था। दिन में उसपर नजर रखी जाती थी और रात में जंजीर से बांध दिया जाता था। उसे खाने-पीने के नाम पर केवल चाय, रोटी और दाल दिया जाता था। अक्सर उसे मारा-पीटा भी जाता था। एक दफा मारकर उसके जबड़े की हड्डी और दाएं हाथ की हड्डी तोड़ दी गई थी। टूटी हड्डी खुद-ब-खुद जुड़ गई। भीम सिंह का कहना है कि उस फार्म के आसपास 30-40 किलोमीटर तक कोई सड़क तक नहीं थी, इसलिए वो कभी वहां से भाग नहीं पाया।
NCRB ने चौंकाया
NCRB (राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो) के हवाले से मीडिया में आई खबर के अनुसार, देश में हर साल 70 हजार से भी ज्यादा बच्चे लापता हो जाते हैं, यानी हर आठवें मिनट में एक बच्चा। यानी केवल वो मामले जिनकी शिकायत पुलिस से की गई। बच्चों की तस्करी कर उन्हें जबरन भीख मांगने, गुलामी भरी जिंदगी और देह व्यापार जैसे धंधों में लगा दिया जाता है। मानव तस्करी के जितने भी केस हुये, उनसे ज्यादा बंधुआ मजदूरी, घरों में काम, देह व्यापार और जबरन शादी में इस्तेमाल किया गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की बनाई कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन (KSCF) और गेम्स24×7 कंपनी के जुटाये आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली बाल तस्करी के लिए हॉटस्पॉट बन गई है। रिपोर्ट के मुताबिक तस्करी से बचाये गये एक-चौथाई से अधिक बच्चे दिल्ली से आते हैं। आंकड़ों के मुताबिक 2016 से 2022 के बीच 18 साल से कम उम्र के 13,549 बच्चों को तस्करों से बचाया गया। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और वॉक फ्री फाउंडेशन के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 80 लाख लोग आधुनिक गुलामी में फंसे हुये हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है।














