UP : अमेठी की संग्रामपुर तहसील, जहां खेतों में धूप अभी ढलती नहीं कि गांव के कोने-कोने में चूल्हे सुलगने लगते हैं, वहीं के पुन्नपुर गांव में एक सन्नाटा पसरा हुआ है। इस सन्नाटे के बीच एक घर ऐसा भी है जहां चूल्हा तो दूर, चिता तक नहीं सुलगी। क्योंकि वहां का बेटा सागर अब इस दुनिया में नहीं रहा। जिस लड़के का सपना शहर जाकर काम करना था, वो अपने ही गांव में “शिकार” बन गया। पुलिस के अनुसार, सागर ने अपने पड़ोस में रहने वाली कुमकुम और उसके जीजा वेद प्रकाश का एक आपत्तिजनक वीडियो बना लिया था। सागर ने यह वीडियो हथियार बना लिया, और शर्तें थोपनी शुरू कर दीं, बदले में संबंधों की मांग। कुमकुम के मन में डर था, गुस्सा भी और शायद शर्म भी। लेकिन जवाब उसने प्यार से नहीं, कुल्हाड़ी से दिया। बताया गया है कि सागर छत के रास्ते कुमकुम के घर घुस आया था। लेकिन वो नहीं जानता था कि वहां सिर्फ प्रेम नहीं, प्रेम का कसाईखाना भी तैयार है। वेद प्रकाश पहले से वहां मौजूद था। सागर ने पांव भी पूरी तरह अंदर नहीं रखा था कि उसके सिर पर कुल्हाड़ी पड़ी, एक वार, फिर दूसरा, फिर सांसें भी थम गईं। कुमकुम ने खून के छींटों को गोबर से लीपा, लाश को प्लास्टिक में लपेटा और हाथ-पैर बांधकर पास के ही पशुशाला में फेंक दिया।
प्रेम और बदला दोनों का यही अंतिम ठिकाना था, गोबर, कुल्हाड़ी और रस्सी। पुलिस ने कुमकुम को अरेस्ट कर जेल भेज दिया, वहीं पुलिस फरार जीजा वेद प्रकाश को बहुत जोर-शोर से खोज रही है।
परिवार की जिद
सागर की बड़ी बहन आरती की आंखें लाल हैं, लेकिन सूखी हैं। उसने ऐलान कर दिया,”जब तक कातिलों को सलाखों के पीछे नहीं डाल दिया जाता, मैं अपने भाई का अंतिम संस्कार नहीं करूंगी…” पुलिस पर दबाव बनाने का आरोप भी है, बहन कहती है कि उन्हें ‘समझाया जा रहा है’, लेकिन भरोसा दिलाने वाला कोई नहीं। पिता सिद्धार्थ की आंखों में शून्यता है, जैसे हर सवाल का जवाब खो गया हो उसी वीडियो में। गांव में अब सन्नाटा नहीं, सिपाही हैं। CO मनोज मिश्रा, थानेदार अभिनेष कुमार, कोतवाल कृष्ण मोहन, और कई थाने की महिला पुलिस टीम लगातार कैंप कर रही हैं।








