Kohramlive : दिन-रात की मेहनत, लेकिन नतीजा? काम समय पर पूरा नहीं होता, फैसले अटक जाते हैं और हर कदम पर कोई न कोई रुकावट खड़ी हो जाती है। अगर आपकी कहानी भी कुछ ऐसी ही है, तो जरा ठहरिये। वास्तु शास्त्र कहता है, कभी-कभी किस्मत नहीं, घर की छोटी-सी चूक हमारी रफ्तार थाम लेती है। वास्तु शास्त्र मानता है कि घर में ऊर्जा का बहाव अगर उलझ गया, तो इंसान की सोच, निर्णय और काम, तीनों उलझ जाते हैं। खासकर उत्तर-पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम और मुख्य द्वार की गड़बड़ी कामों को आगे बढ़ने नहीं देती।
मुख्य प्रवेश द्वार: मौके यहीं से आते हैं
घर का मेन गेट सिर्फ दरवाजा नहीं, ऊर्जा का रास्ता होता है। अगर यहां जूते-चप्पल, कबाड़ या टूटी चीजें पड़ी हों, तो सकारात्मक ऊर्जा लौट जाती है। वास्तु सलाह देता है कि मेन गेट साफ रखें, पर्याप्त रोशनी हो, वहीं, दरवाजा खुला और अवरुद्ध न हो
उत्तर दिशा की अनदेखी पड़ सकती है भारी
उत्तर दिशा को करियर और नये अवसरों की दिशा कहा गया है। यहां भारी अलमारी, कबाड़ या बंद जगह तरक्की पर ब्रेक लगा देती है। ध्यान रखें कि उत्तर दिशा हल्की और साफ रहे, यहां खुलापन और रोशनी जरूरी है। वहीं, दक्षिण-पश्चिम दिशा फैसलों की बुनियाद मानी गई है। यह कोना स्थिरता और निर्णय क्षमता से जुड़ा है। अगर यहां गंदगी, खालीपन या अव्यवस्था हो, तो फैसले कमजोर पड़ने लगते हैं। इसलिये इस दिशा भारी और मजबूत फर्नीचर रखें, इस कोने को अव्यवस्थित न छोड़ें।
घर में जमा कबाड़: तरक्की का सबसे बड़ा दुश्मन
पुराने अखबार, खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान, टूटे फर्नीचर, वास्तु के अनुसार ये नकारात्मक ऊर्जा को बुलावा देते हैं।नतीजा, मानसिक सुस्ती, कामों में टालमटोल और बार-बार रुकावट। इसी तरह रोशनी और हवा की कमी, रुकी हुई ऊर्जा मानी जाती है। अंधेरे, बंद और हवा रहित कमरे इंसान की कार्यक्षमता पर सीधा असर डालते हैं। जहां रोशनी और हवा नहीं, वहां उत्साह भी नहीं।
वास्तु की छोटी लेकिन असरदार सलाह
सुबह मुख्य दरवाजे पर हल्का पानी छिड़कें, उत्तर दिशा की नियमित सफाई करें, टूटी घड़ी और खराब बल्ब तुरंत बदलें।






