वैक्‍सीनेशन के लिए लोगों को ठेठ भाषा में समझाएंगी ये महिलाएं, ऐसे बना रहीं योजना (VIDEO)

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  • मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जागरूकता अभियान में लिया हिस्सा, संचार माध्यमों का प्रयोग कर लोगों को बनाया जा रहा जागरूक 

RANCHI : पश्चिमी सिंहभूम के मझगांव प्रखंड स्थित एक घर के एक बड़े आंगन में करीब 20 महिलाएं बैठीं हैं। ये जेएसएलपीएस सखी मंडल, आंगनबाड़ी सेविका, साहिया दीदी हैं। आज के समय में इन्‍हें वैक्सीन सोशल मोबिलाइजर के नाम से जाना जाता है। वे उसी गांव की हैं और सरकार की ओर से कोरोना टीकाकरण को लेकर दी गईं अलग-अलग जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभा रहीं हैं। वे यहां बैठकर आसपास के क्षेत्र में चलाए जाने वाले टीकाकरण जागरूकता अभियान की योजना बना रहीं हैं, ताकि वहां के लोगों को टीकाकरण के प्रति जागरूक किया जा सके। ये सभी टीकाकरण के फायदे अपनी भाषा और बोली में समझाने की जुगत में लगी हैं। कारण यह कि यहां की बड़ी आबादी हिंदी कम बोलती है। यही कार्य राज्य के अन्य प्रमंडलों में भी किया जा रहा है, ताकि टीकाकरण अभियान को और गति मिल सके।

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मुख्यमंत्री बने जागरूकता अभियान का हिस्‍सा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सक्रियता से जागरूकता अभियान का हिस्सा बने। उन्होंने टीका लिया और इससे संबंधित वीडियो भी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी किया। इस वीडियो को व्यापक रूप से सोशल मीडिया पर  जारी किया गया। ऐसे कार्य ने इस जन आंदोलन में एक बूस्टर के रूप में काम किया। मुख्यमंत्री ने अपील में लोगों से कहा कि वे बिना किसी हिचकिचाहट के वैक्सीन लें। अपने परिवार के अन्य लोगों को भी टीकाकरण के लिए प्रेरित करें। हमारे राज्य को संक्रमण से बचाने के लिए हर किसी को जल्द से जल्द टीका लगाना चाहिए। टीकाकरण से कोई नुकसान नहीं होता।

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क्षेत्रीय भाषाओं में जानकारी देने की कोशिश

गौरतलब है कि झारखंड में आबादी का एक बड़ा हिस्सा आदिवासी समाज का है। यही वजह है कि हो, मुंडारी, कुडुख, सादरी, संताली, नागपुरी, पंचपरगनिया, खोरठा समेत अन्य जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के माध्यम से टीका लेने के लिए जागरूक किया जा रहा है। प्रदेश में टीकाकरण अभियान शुरू होने के बाद सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती सुदूरवर्ती क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों को वैक्सीन के प्रति जागरूक करना था। देश के अन्य हिस्सों की तरह झारखंड भी टीकाकरण से जुड़े मिथकों और भ्रम से प्रभावित हुआ। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने सघन जागरूकता अभियान शुरू किया। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे यह सुनिश्चित करें कि लोगों के बीच कोई अफवाह न फैले।

जागरूकता अभियान में क्षेत्रीय भाषाओं का इस्तेमाल किया गया। पंचायत प्रतिनिधियों से सहयोग लिया गया। मुख्यमंत्री ने स्वयं पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर अपने-अपने क्षेत्र में लोगों में जागरूकता लाने को कहा। राज्य के हर जिले के डीसी को फील्ड विजिट करने, ग्रामपंचायत प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने और सामाजिक स्तर पर जागरूकता अभियान में हिस्सा लेने का निर्देश दिया गया। सरकार ने जन जागरूकता पैदा करने और टीकाकरण अभियान को जनांदोलन में बदलने के लिए संचार के सभी माध्यमों का इस्तेमाल किया।

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सभी क्षेत्रीय भाषाओं में समाचार पत्र विज्ञापन

वैक्सीन से संबंधित भ्रम को दूर करना और टीकाकरण केंद्र तक लोगों को स्वतः ले जाना प्रशासन के लिए एक चुनौती पूर्ण कार्य था। मई में सरकार ने ओलचिकी, मुंडारी, हो, कुड़ुख जैसी बोली, भाषा और हिंदी में अखबारों के विज्ञापनों की एक श्रृंखला जारी की। ये विज्ञापन सभी स्थानीय और राष्ट्रीय अखबारों में प्रकाशित हुए थे। यह सरकार द्वारा की गई अपनी तरह की विशेष पहल थी,  जहां वैक्सीन के लिए अखबारों में कई भाषा के विज्ञापन प्रकाशित किए गए हों । इस तरह राज्य सरकार ने टीकाकरण के लिए हर वो प्रयास किया, जिससे लोगों में टीके के प्रति फैले भ्रम को दूर कर अधिक से अधिक लोगों का टीकाकरण सुनिश्चित किया जा सके।

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