Garhwa(Nityanand Dubey) : संडे की सुस्त दोपहर थी, जब सदर SDM संजय कुमार की नजर बस स्टैंड के पास लगे एक अल्ट्रासाउंड सेंटर के बोर्ड पर पड़ी और यहीं से शुरू हुई एक सच्चाई की परतें खोलने वाली कहानी।
संदेह ने उन्हें भीतर झांकने पर मजबूर किया। जांच में सामने आया कि यहां अल्ट्रासाउंड करने वाला युवक न कोई डॉक्टर था, न प्रशिक्षित टेक्नीशियन। महज 12वीं पास, बीए की पढ़ाई कर रहा था और 30 हजार रुपये मासिक पर इस सेंटर में काम कर रहा था। SDM की मौजूदगी के दौरान एक गर्भवती महिला पति के साथ जांच करवाने पहुंची। जब वह बाहर आई तो साफ बताया कि उसी युवक ने उसका अल्ट्रासाउंड किया है। न डॉक्टर, न परामर्श, सिर्फ लापरवाही।
पूरे मामले की जानकारी सिविल सर्जन को दी गई, जिनके निर्देश पर साइट पर ही अल्ट्रासाउंड सेंटर को सील कर दिया गया। कार्रवाई के समय महिला सब-इंस्पेक्टर जूली टुडू और पुलिस बल भी मौके पर मौजूद थे। SDM ने बाकी अल्ट्रासाउंड सेंटरों को भी सख्त हिदायत दी है कि कानून का पालन करें वरना कार्रवाई तय है।












