रांची : आदिवासी-मूलवासी संगठनों के द्वारा आज विधानसभा का घेराव किया गया। विधानसभा घेराव का नेतृत्व पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो, पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा, पूर्व विधायक अमित महतो, प्रेम शाही मुंडा, बबलू मुंडा, अभय भूट कुवर, शिव टहल नायक, आजम अहमद, कुंदरशी मुंडा ने किया। खतियान आधारित स्थानीय, नियोजन, उद्योग, भाषा नीति, आदिवासी मूलवासी छात्र नौजवानों को नौकरी मिले। वहीं ठेका पट्टा और व्यापार में भागीदारी की मांग सुनिश्चित करने के लिए संगठन के लोग सड़क पर उतरे और विधानसभा का घेराव किया। हरमू मैदान से शुरू होकर मार्च विधानसभा तक पहुंचा।
इस मौके पर पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने कहा कि अलग झारखंड बनने के बाद हमारे पुरखों का सपना साकार नहीं हुआ। झारखंड में न बेरोजगारों को नौकरी मिली और न ही कारोबार। हेमंत सरकार तानाशाह की तरह काम कर रही है। हमलोग किसी भी कीमत पर बाहरी भाषा, संस्कृति को बर्दाश्त नहीं करेंगे। चाहे इसके लिए हमें कोई भी आहुती देनी पड़े।
पूर्व एमएलए अमित महतो ने कहा कि झारखंड की जन भावनाओं को लेकर सरकार काम नहीं कर रही थी, इसलिए मैंने पार्टी से इस्तीफा देकर खतियान आधारित स्थानीय नीति की मांग को लेकर सड़क पर उतरा हूं। अंतिम समय तक संघर्ष जारी रहेगा।

पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो ने कहा कि झारखंड सरकार का रिमोट कंट्रोल बाहरी शक्तियों के पास है। झारखंडियों के हक के लिए जन संघर्ष जरूरी है।
पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि 21 वर्षों में सिर्फ और सिर्फ बाहरियों का विकास हुआ है। यहां की सरकार भाषा-संस्कृति के साथ-साथ झारखंड के बालू, खनिज संपदा को पूरी तरह से बेच दिया है।
वहीं आदिवासी जन परिषद के अध्यक्ष प्रेम शाही मुंडा ने कहा कि सभी राजनीतिक पार्टियों ने झारखंड की भाषा को ही नहीं बल्कि यहां की सांस्कृतिक विरासत को भी समाप्त कर दिया गया है।केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने कहा कि हेमंत सरकार आदिवासी मूलवासियों के हित में काम नहीं कर रही है।

आंदोलनकारी नेता आजम अहमद ने कहा पूर्वजों की कुर्बानी और बलिदान किसी हालत में बेकार नहीं जायेगी। जल, जंगल जमीन और नौजवानों के भविष्य के लिए पूर्वजों की लड़ाई को अंतिम दम तक लड़ेंगे।
इस कार्यक्रम में तीर्थ नाथ आकाश, कुंदरसी मुंडा, विकास महतो, आजम अहमद, महान पुरोहित जगलाल पाहन, देवेंद्र महतो, पवन तिर्की, निरंजना हेरेज टोप्पो, सुबोध दांगी, अभय भुट कुंवर, सोमदेव करमाली, संजय मेहता, मनोज यादव, शिव टहल नायक, लाला महली, सुरेंद्र लिंडा, मुकेश भगत, प्रदीप कच्छप, प्रीतम लोहरा, दुर्गा कच्छप, सेलिना लकड़ा, सुप्रिया कच्छप, अमर मुंडा, प्रेम लिंडा, विकास सांगा, अनिल उरांव कच्छप, सकुंतला उरांव, सुरेश मुंडा, अशोक मुंडा, राजू मुंडा नायक, प्रवीन कच्छप आदि मौजूद रहे।

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