Bihar : स्वतंत्रता दिवस पर घर के बाहर तिरंगा लहरा रहा था, गांव के लोग सलामी दे रहे थे, मगर उस घर की चौखट पर एक मां की आंखें अब भी अपने बेटे के लिये इंसाफ तलाश रही थीं। यह कहानी है भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की। सरकार ने परिवार के लिये आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है, लेकिन भरत की मां आशा देवी के लिये ये मदद उनकी सबसे बड़ी जरूरत नहीं है। उनकी जुबान पर एक ही बात है, ‘पैसा नहीं चाहिये… मेरे बेटे के लिये न्याय चाहिये।’
तिरंगे के नीचे फिर उठी न्याय की आवाज
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भरत तिवारी के घर के बाहर तिरंगा फहराया गया। परिवार और गांव के लोग वहां जुटे। तिरंगे को सलामी दी गई। लेकिन इसी मौके पर परिवार ने एक बार फिर भरत तिवारी के लिये न्याय की मांग बुलंद कर दी। आशा देवी का कहना है कि सरकार की आर्थिक मदद और नौकरी देने की घोषणा अपनी जगह है, लेकिन परिवार की पहली प्राथमिकता भरत तिवारी को न्याय दिलाना है। उनकी मांग है कि भरत तिवारी को शहीद का दर्जा दिया जाये। भरत की मां ने मामले में आरोपित पुलिस अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी दोहराई है। परिवार का कहना है कि जिन लोगों पर गंभीर आरोप हैं, उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिये। भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी ने सरकार की आर्थिक सहायता और नौकरी के ऐलान का स्वागत किया है। लेकिन उन्होंने भी साफ कर दिया कि परिवार की पहली मांग न्याय है। उनका कहना है कि मामले में जिन लोगों पर आरोप हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिये। परिवार चाहता है कि जो आरोपी अभी तक बाहर हैं, उनकी गिरफ्तारी हो और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाये। यहां याद दिला दें कि भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच न्यायिक जांच आयोग कर रहा है। आयोग अपनी अंतरिम रिपोर्ट बिहार सरकार को सौंप चुका है। इसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परिवार के लिये आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की।















