Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा मंडल कारा की ऊंची दीवारों के भीतर, आज कुछ ऐसा हुआ जिसने कई बंद जिंदगियों को एक नई आशा दी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) की ओर से आयोजित विधिक जागरूकता शिविर में कैदियों को बताया गया कि जो वकील रखने में असमर्थ हैं, वे भी न्याय से वंचित नहीं रहेंगे। शिविर में मौजूद थीं DLSA सचिव निभा रंजन लकड़ा, जिन्होंने साफ कहा “न्याय सिर्फ उनके लिए नहीं जो पैसे दे सकते हैं, बल्कि उनके लिए भी है जो चाहकर भी खुद की आवाज नहीं उठा सकते।”
शिविर में अंडर ट्रायल रिव्यू कमिटी की भूमिका और नियमों को विस्तार से समझाया गया। ऐसे 16 श्रेणियों के कैदियों की जानकारी दी गई जो जमानत पर रिहाई के योग्य माने जा सकते हैं जैसे कि छोटे अपराध में पहली बार बंद कैदी, बीमार या मानसिक रूप से अस्वस्थ कैदी, 60-90 दिन से जेल में बंद वे लोग जिनका केस अब भी अधूरा है। सचिव ने यह भी कहा कि जो कैदी खुद वकील नहीं कर सकते, वे DLSA में आवेदन देकर मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इतना ही नहीं, सजायाफ्ता कैदी भी यदि अपील करना चाहते हैं, तो उन्हें उसके अधिकारों की जानकारी दी गई। शिविर में मौजूद थे जेलर महताब आलम, सुरक्षा कर्मी, और कई कैदी, जिनकी आंखों में आज डर नहीं, बल्कि एक उम्मीद की चमक थी। “जेल से बाहर निकलना ही मुक्ति नहीं, बल्कि न्याय की राह तक पहुंच पाना असली आजादी है।”










