TRENDING : इंडिया के पड़ोसी देश बांग्लादेश के कई इलाकों में सागर का बढ़ता वाटर लेवल अनेक महिलाओं को सेक्स वर्कर (Sex Workers) बनने पर विवश कर रहा है। बेशक यह जानकारी विचित्र लगती है, पर है सच। ऐसे इलाकों में 6 माह काम करने के बाद आई एक रिपोर्ट में ऐसा दावा किया है।
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महिलाओं को कहा जाता है लड़कियां
रिपोर्ट के मुताबिक समुद्र के बढ़ते जलस्तर की वजह से बांग्लादेश के दक्षिण-पश्चिम तट पर महिलाओं को जीवित रहने के लिए इस काम को करने पर बाध्य होना पड़ रहा है। दक्षिण पश्चिम तट पर जो वेश्यालय बने हैं वहां महिलाओं को “लड़कियां” कहा जाता है और घर ‘काम’ की जगह हैं, आराम की नहीं। वहां पहुंचने के बाद एक रिपोर्टर को भी महिलाओं ने पहले विदेशी ग्राहक ही समझ लिया। जब उसने ने महिला को अपनी पहचान बताई तो एक महिला ने वहां रहने वाली तमाम महिलाओं की सच्चाई से उसे अवगत कराया, जिसे जानकर कोई भी हैरान रह जाएगा।
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घर और खेत नष्ट हो गए
प्रवीण नाम की महिला ने बताया कि कैसे समुद्र के बढ़ते जल स्तर, नदी के कटाव और चक्रवातों से उसके परिवार के घर और खेत नष्ट हो गए थे। महिला ने बताया कि वह उस वक्त 15 साल की थी और परिवार को पैसों की जरूरत थी। फिर एक दिन, एक महिला उनके पास आई और कहा, अगर वो उसके साथ जाएगी तो वो उसे एक कपड़ा कारखाने में नौकरी दिला देगी। लेकिन, प्रवीण को फैक्ट्री में काम दिलाने की जगह महिला ने बनिशंता के वेश्यालय में बेच दिया। बनिशंता बांग्लादेश के सबसे पुराने वेश्यालयों में से एक है, जो पास के मोंगला बंदरगाह के पास ग्राहकों को आकर्षित करता है।
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बनिशंता वेश्यालय में 100 महिलाएं
बनिशंता वेश्यालय में करीब 100 महिलाएं काम करती हैं। कई युवतियों को यहां तस्करी कर लाया गया है, क्योंकि उनके जीवन और आजीविका को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव ने असुरक्षित बना दिया। वहां सत्तर के दशक की महिलाएं भी हैं जो अब सेक्स वर्कर का काम नहीं कर रही हैं, लेकिन वो कहीं और नहीं जाना चाहती। वहां बहुत छोटी उम्र की लड़कियों से लेकर बूढ़ी महिलाओं में एक अलग समुदाय होने की भावना पैदा हो गई है।
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गायब हो रही यहां की भूमि
वेश्यालय की प्रमुख रजिया बेगम ने कहा हम अब फंस गए हैं। सेक्स वर्कर अपने घरों को और कहीं नहीं बना सकतीं, क्योंकि इसका मतलब होगा कि हम सीमा पार कर पास के गांव में पहुंच जाएं, जहां निश्चित तौर पर लोग उनका स्वागत नहीं करेंगे और विरोध भी होगा। यहां भूमि गायब हो रही है और यह हमारे और हमारे बच्चों के लिए एक जोखिम है।















