Chouparan(Krishna Paswan) : चौपारण की मिट्टी आज फिर गमगीन है। एक नन्ही जिंदगी की सांसें थम गईं और गांव की गलियों में मातम की चुप्पी उतर आई। चोरदाहा पंचायत के जमुनिया गांव की 13 साल की सरस्वती कुमारी की असमय मृत्यु ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। सरस्वती, जो आदिम जनजाति समुदाय से थीं, बुखार से पीड़ित थीं। घरवाले उसे चौपारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, लेकिन हालात बिगड़ने पर डॉक्टरों ने हजारीबाग रेफर कर दिया। रास्ते में ही वह मर गई। सरस्वती तीन बहनों में दूसरी थीं, उसकी बड़ी बहन का नाम किरण कुमारी और छोटी का अंजली कुमारी है। माता-पिता के देहांत के बाद तीनों बहनों का पालन-पोषण नाना-नानी के घर में हो रहा था। अब इस परिवार में एक और गहरा सन्नाटा उतर आया है। गांव के लोगों ने बताया कि करीब एक महीने पहले इसी गांव की पूजा कुमारी की भी बीमारी के दौरान मौत हो गई थी। उस समय भी प्रशासन ने न तो जांच टीम भेजी, न कोई ठोस कदम उठाया। अब एक और नन्ही जान चली गई। गांव की औरतों की आंखें नम हैं और हर बुज़ुर्ग का एक ही सवाल, “कब सुधरेगी हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था?”
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