Kohramlive : अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर कदम रखने वाले पहले भारतीय शुभांशु शुक्ला ने कहा कि जब कोई इंसान धरती से ऊपर जाता है, तो ‘देश’ नहीं, पूरी पृथ्वी उसकी पहचान बन जाती है। उन्होंने छात्रों के साथ वर्चुअल बातचीत में कहा, “अंतरिक्ष में जाकर एहसास होता है कि मानवता ही सबसे बड़ी पहचान है।” गोवा से भारतीय विद्यालय प्रमाणपत्र परीक्षा परिषद से जुड़े छात्रों को संबोधित करते हुये शुभांशु ने कहा कि अंतरिक्ष से नीचे देखने पर पूरी धरती एक परिवार जैसी लगती है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार भारत को देखा, तो वह क्षण बेहद भावुक था। “नासा के एक साथी ने कहा, हम भारत के ऊपर से गुजर रहे हैं। मैंने खिड़की से देखा, रात के अंधेरे में चमकती भारत की रेखायें जैसे किसी मां के आंचल में सजे दीप हों। उस पल दिल भर आया।” उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में देश, भाषा या सीमायें नहीं होतीं, वहां सिर्फ इंसान और इंसानियत होती है। जब आप धरती छोड़ते हैं, तो आपको एहसास होता है कि यह पूरा ग्रह ही आपका घर है। शुभांशु ने कहा कि राकेश शर्मा द्वारा कही गई पंक्ति “सारे जहां से अच्छा” अब उन्हें पूरी तरह समझ में आती है। उन्होंने कहा अंतरिक्ष से भारत को देखना, उस पंक्ति का असली अर्थ जी लेना है। शुभांशु ने छात्रों से कहा कि सपने देखने से मत डरिये “सीमायें सिर्फ जमीन पर हैं, आसमान में नहीं।”
पूरी धरती एक परिवार जैसी लगती है, गजब का बोल गये शुभांशु…
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