Bihar : बिहार के कटिहार से एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को दंग कर दिया। जलकी गांव की शांत जिंदगी एक खौफनाक रात में बदल गई, जब अविश्वास के जहर ने एक घर की खुशियों को हमेशा के लिये छीन लिया करीब चार साल पहले मौसमी दास की शादी सुकुमार दास के साथ हुई। दो मासूम बेटों की मां मौसमी का पहला बच्चा सांवला था, जैसा उनका खुद का रंग है। लेकिन जब दूसरा बेटा जन्मा और उसका रंग काफी गोरा निकला, तो सुकुमार के मन में शक का बीज जम गया। घर में रोज बातें, ताने, आरोपों की आग, मौसमी बार-बार समझाती रही कि बच्चे का रंग किस्मत का खेल होता है, चरित्र का नहीं, पर शक की आंधियां दिमाग को अंधा कर देती हैं। झगड़ों से तंग आकर मौसमी अपने मायके चली आई। उसे लगता था कि दूरी शायद तूफान को शांत कर दे, पर उसे क्या मालूम, दूरी नहीं, बल्कि खामोशी ने अपराध को और पुख्ता कर दिया था। उस रात सुकुमार मायके गया। अपने दो बेटों के पास सोई पत्नी को देखा, उसमें पागलपन सवार था। एक पति राक्षस बन गया और दो बच्चे उस मां की गोद के बिना रोते रह गये।
घटना के अगले दिन जब बच्चों की सिसकियां जोर से गूंजीं, तो परिजन कमरे में पहुंचे, दरवाजा खुला और सब कुछ खत्म दिखा। घर का आंगन चीखों से भर गया, गांव में भीड़ उमड़ पड़ी और खबर जंगल की आग की तरह फैल गई। मृतका के पिता षष्ठी दास और दादी ने रोते हुये कहा कि “हमारी बेटी ने किसी का क्या बिगाड़ा था? उसे बस इंसाफ दिलाइये।” पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और आरोपी सुकुमार को गिरफ्तार कर लिया है।






