Kohramlive : नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की रंगीन गलियों में होली ( Holi 2025 ) का रंग अब अपनी छटा बिखेरने को तैयार था, लेकिन प्रशासन की चौकस नजर हर कोने-कोने पर बिछी हुई थी। चिलचिलाती धूप में यात्रियों की भीड़ उमड़ी थी — किसी को अपने गांव जाना था, तो कोई अपनों के पास लौटने की हड़बड़ी में था। रेलवे प्रशासन ने इस बार सुरक्षा का पहरा और भी कड़ा कर दिया था। फुटओवर ब्रिज पर लोगों के बैठने पर सख्त पाबंदी लगा दी गई थी। प्रशासन की चेतावनी साफ थी — “जो इस नियम को तोड़ेगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।” पुल और सीढ़ियों पर बैठने वालों को पुलिसकर्मी सख्ती से हटा रहे थे।
पटना, राजेंद्र नगर और दानापुर जैसे बिहार के व्यस्त स्टेशनों पर भी ऐसी ही सख्ती थी। हर तरफ पुलिस के जवान तैनात थे — किसी की नजर टिकट खिड़की पर थी, तो कोई भीड़ को अनुशासन में रख रहा था। वहीं रांची, धनबाद और बोकारो जैसे झारखंड के प्रमुख स्टेशनों पर भी सुरक्षा का घेरा मजबूत था। स्टेशन के हर कोने में CCTV कैमरे हर हलचल पर नजर गड़ा रहे थे। लेकिन इन सख्त इंतजामों के बीच यात्रियों के चेहरे पर बेचैनी थी। थके हुये यात्री कतारों में खड़े अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। एक बुजुर्ग अपनी लाठी के सहारे धीमे कदमों से आगे बढ़ रहे थे, तो एक माँ अपनी गोद में सोते बच्चे को संभालते हुये लंबी लाइन में खड़ी थी।
“भैया, महिलाओं और बच्चों के लिये अलग लाइन कर दीजिए न… बहुत मुश्किल हो रही है,” रांची की रहने वाली अंजू देवी ने गुस्से और बेबसी के मिले-जुले स्वर में कहा। वहीं अजय नाम के एक यात्री का सब्र भी टूटने को था — “घंटे भर से लाइन में खड़ा हूँ, अब तक नंबर नहीं आया।” हालात को देखते हुये प्रशासन ने नई व्यवस्था की — प्लेटफॉर्म 16 के यात्रियों के लिए गेट नंबर 10 का रास्ता खोला गया, ताकि भीड़ को बेहतर ढंग से नियंत्रित किया जा सके।
भीड़ की इस अफरा-तफरी में रेलवे प्रशासन का दिल भी धड़क रहा था। उन्होंने स्टेशन के बाहर अस्थायी प्रतीक्षालय का इंतजाम कर दिया था। वहां बैठे कुछ लोग सुकून की सांस ले रहे थे। किसी के हाथ में पानी की बोतल थी, तो कोई मोबाइल चार्जिंग बोर्ड के पास बैठा अपने फोन को ताक रहा था — मानो अपनों से जुड़ने का बेसब्री भरा इंतजार उसकी आंखों में नाच रहा हो। रेलवे स्टेशन पर इस बार की होली में भले ही गुलाल की चमक कम दिखी हो, लेकिन वहां हर यात्री की आंखों में अपने गांव, अपने घर और अपने अपनों से मिलने की उमंग जरूर झलक रही थी।
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