UP : सुबह का वक्त था, घर में भजन की मधुर आवाज गूंज रही थी। मां की आंखों में बेटे की लंबी उम्र की दुआ थी और पिता मेहमानों की सेवा में बीजी थे। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस बेटे के लिये घर में खुशियों की प्रार्थना हो रही है, वही बेटा कुछ घंटों बाद उस घर की खुशियां हमेशा के लिये छीन लेगा। गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक थाना क्षेत्र की भीमनगर कॉलोनी में बीती देर रात एक ऐसी घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया, जहां खून के रिश्ते ही रिश्तों के दुश्मन बन गये।

नशे में लौटे बेटे, विरोध किया तो बरपा कहर
पुलिस के अनुसार, 55 साल के गंगाशरण और उनकी पत्नी विमलेश की मौत उनके ही दो बेटों की पिटाई से हुई। बताया जा रहा है कि दोनों बेटे देर रात शराब के नशे में घर पहुंचे थे। पिता ने जब उनकी हालत देखकर टोका तो बात बिगड़ गई। कुछ ही पलों में घर का माहौल बदल गया। आरोप है कि दोनों बेटों ने पिता के साथ मारपीट शुरू कर दी। पति को बचाने दौड़ी मां भी बेटों के गुस्से का शिकार बन गईं। चीख-पुकार के बीच घर की दीवारें उस दर्द की गवाह बन गईं, जिसे सुनकर पड़ोसी भी सहम गये।

बहन का आरोप, संपत्ति को लेकर चल रहा था दबाव
घटना की सूचना मकान की पहली मंजिल पर रहने वाले किरायेदार ने रात करीब एक बजे पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों भाइयों को हिरासत में लिया और घायल दंपती को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक दंपती की बेटी ज्योति ने अपने दोनों भाइयों ललित (27) और दीपक (25) के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है। ज्योति का आरोप है कि दोनों भाई काफी समय से माता-पिता पर संपत्ति अपने नाम कराने का दबाव बना रहे थे। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के मेडिकल परीक्षण में शराब पीने की पुष्टि हुई है। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की वजह और चोटों की गंभीरता की पूरी तस्वीर साफ होगी।
जिस घर में गूंजी थी जन्मदिन की खुशियां, वहीं छा गया मातम
परिजनों के मुताबिक, गंगाशरण और विमलेश अपने बेटों से बेहद प्यार करते थे। बेटों की गलत आदतों के बावजूद उन्होंने उन्हें संभालने की हर कोशिश की। बीते 20 जुलाई को बड़े बेटे ललित का जन्मदिन था। घर में कीर्तन हुआ था, मां ने बेटे की लंबी उम्र की कामना की थी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जिस आंगन में खुशियों के गीत गूंजे थे, उसी आंगन में कुछ घंटों बाद दर्द की चीखें सुनाई दीं। भीमनगर कॉलोनी आज भी यही सवाल पूछ रही है, आखिर वह कौन सा गुस्सा था, जिसने एक बेटे के हाथों से मां-बाप का साया छीन लिया?
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