Kohramlive : जिस वक्त देश के पहाड़ों में बर्फ की चादर पर खून के छींटे पड़े, और पहलगाम की घाटी गोलियों की गूंज में कांपी, उसी वक्त देश के भीतर कुछ ऐसा भी हुआ, जो बाहर से शांत था, लेकिन भीतर से एक भीषण चेतावनी की तरह था। पुणे मुख्यालय वाली म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL) ने देश के बारह तोप-गोला फैक्ट्रियों में युद्ध-सदृश सायरन बजा दिया है। अब कोई छुट्टी नहीं, अब कोई बहाना नहीं, अब सिर्फ उत्पादन, सिर्फ तैयारियां। ये कोई पोस्टर नहीं, कोई नारा नहीं, ये उन फैक्ट्रियों की दीवारों से आती फुसफुसाहट है, जहां टैंक के गोले, हवाई बम और रॉकेट लॉन्चर बनते हैं। खमरिया, चंद्रपुर, इटारसी, बडमाल, कासिपुर, हर जगह सिर्फ एक ही बात – अलर्ट मोड ऑन।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों की जुबां कुछ और कह रही है, “अप्रैल का टारगेट पूरा नहीं हुआ।” लेकिन जमीनी हकीकत अलग है, सीमा पर कुछ बदल रहा है और देश ने भीतर से तैयारी शुरू कर दी है। कर्मचारियों को कहा गया “छुट्टियां भूल जाओ, देश पहले है।” दो दिन से ज्यादा की छुट्टी? मना है। पहले से ली छुट्टियां? रद्द। इधर रक्षा मजदूर संघ के नेता कहते हैं “कोई आधिकारिक सर्कुलर नहीं है।”
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