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रेलवे की दो चादरों का राज, रोचक बातें, जानें…

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Kohramlive : भारतीय रेलवे की AC कोच यात्रा में सीट पर पहुंचते ही मिलने वाली साफ-सुथरी बेडरोल किट सफर को और आरामदायक बना देती है। सफेद चादर, मुलायम तकिया, तौलिया और गर्म कंबल, यही चीजें लंबी यात्रा की थकान को काफी हद तक कम कर देती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रेलवे आखिर एक यात्री को दो चादरें क्यों देता है? ज्यादातर यात्री इनका इस्तेमाल अपनी सुविधा के हिसाब से करते हैं। कोई दोनों चादरें सीट पर बिछा लेता है, तो कोई एक चादर ओढ़ने के लिये इस्तेमाल करता है। लेकिन रेलवे ने अब इस सवाल का जवाब साफ कर दिया है कि इन दो चादरों का असली इस्तेमाल क्या है।

दोनों चादरों का काम है अलग-अलग

रेलवे के मुताबिक, एसी क्लास में यात्रियों को दी जाने वाली बेडरोल किट में शामिल दोनों चादरों की अपनी अलग भूमिका होती है। पहली चादर: इसे अपनी सीट या बर्थ पर बिछाने के लिये दिया जाता है, ताकि यात्री साफ सतह पर आराम कर सके। दूसरी चादर: इसका इस्तेमाल कंबल के नीचे किया जाना चाहिये। यानी पहले चादर ओढ़ें और उसके ऊपर कंबल लें, जिससे शरीर और कंबल के बीच एक साफ परत बनी रहे।

कंबल के नीचे चादर लगाना क्यों है जरूरी?

इसके पीछे वजह है साफ-सफाई और स्वास्थ्य। ट्रेन में इस्तेमाल होने वाले ऊनी कंबलों को हर यात्री के बाद धोना संभव नहीं होता। ऐसे में अगर यात्री सीधे कंबल ओढ़ता है, तो कंबल का संपर्क सीधे शरीर से हो सकता है। दूसरी चादर इसी परेशानी को दूर करती है। यह शरीर और कंबल के बीच एक सुरक्षा परत का काम करती है। रेलवे इस्तेमाल के बाद चादर, तकिया कवर और तौलिये को धोकर दोबारा यात्रियों के लिये उपलब्ध कराता है।

अब कंबल के साथ मिलेगा कवर!

यात्रियों की सुविधा और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुये रेलवे ने कंबल के लिये कवर की व्यवस्था भी शुरू की है। इस पहल के तहत यात्रियों को कंबल के साथ कवर उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे अलग से चादर लगाने की जरूरत कम हो जायेगी। फिलहाल यह सुविधा कुछ ट्रेनों में शुरू की गई है, जिसमें उत्तर पश्चिम रेलवे की कुछ ट्रेनें और कामाख्या से हावड़ा के बीच चलने वाली नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शामिल हैं।

रेलवे कितने समय बाद बदलता है बेडरोल?

रेलवे बेडरोल की गुणवत्ता बनाये रखने के लिये इन्हें तय समय के बाद बदलता रहता है। तौलिया और तकिये का कवर लगभग 9 महीने में बदले जाते हैं। हैंडलूम लिनन, लगभग 12 महीने में बदला जाता है। पॉलीवास्ट्रा लिनन, लगभग 24 महीने में बदला जाता है। तकिया और ऊनी कंब, : लगभग 24 महीने में बदले जाते हैं। अगली बार AC कोच में सफर करें तो याद रखें ये बात।  रेल यात्रा के दौरान मिलने वाली बेडरोल किट सिर्फ सुविधा के लिए नहीं, बल्कि स्वच्छता को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है। इसलिए अगली बार जब AC कोच में सफर करें, तो एक चादर सीट पर बिछायें और दूसरी चादर कंबल के नीचे लगाकर इस्तेमाल करें। इससे आपका सफर ज्यादा आरामदायक और हाइजीनिक रहेगा।

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