Kohramlive : सावन का महीना शुरू होते ही हर ओर भगवान शिव की भक्ति का रंग दिखाई देने लगता है। गेरुआ वस्त्रों में शिवभक्त कांवड़ लेकर लंबी यात्रा पर निकल पड़ते हैं और पवित्र गंगाजल लेकर भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। कई किलोमीटर की यह पदयात्रा आस्था और विश्वास की परीक्षा होती है, लेकिन लगातार पैदल चलने का सबसे ज्यादा असर पैरों पर पड़ता है। अगर यात्रा से पहले पैरों की सही तैयारी न की जाये तो छाले, एड़ी में दर्द, सूजन, मांसपेशियों में खिंचाव और थकान जैसी परेशानियां सफर को मुश्किल बना सकती हैं। इसलिये कांवड़ यात्रा पर जाने से पहले पैरों को भी उतनी ही तैयारी की जरूरत है, जितनी यात्रा की बाकी तैयारियों को।
यात्रा से पहले करें पैरों की स्ट्रेचिंग
अगर आप कांवड़ यात्रा पर जाने वाले हैं तो कुछ दिन पहले से ही पैरों की एक्सरसाइज शुरू कर दें। रोज सुबह और शाम 5 से 10 मिनट तक आसान स्ट्रेचिंग करें। एंकल रोटेशन
टो स्ट्रेच, काफ स्ट्रेच, जैसी एक्सरसाइज पैरों की मांसपेशियों को लचीला बनाती हैं। इससे लंबे समय तक चलने के दौरान दर्द और अकड़न की समस्या कम हो सकती है। वहीं, लंबी पदयात्रा के लिये पैरों की त्वचा का स्वस्थ होना बेहद जरूरी है। ध्यान रखें, फटी एड़ियों पर नियमित मॉइस्चराइजर या फुट क्रीम लगायें। पैरों के नाखून छोटे और साफ रखें। यात्रा से पहले त्वचा को ज्यादा रूखा न होने दें। स्वस्थ और मुलायम त्वचा होने से छाले पड़ने की संभावना कम हो जाती है।
छालों से बचाव के लिये अपनायें ये तरीके
कांवड़ यात्रा में सबसे आम समस्या पैरों में छाले पड़ना है। इससे बचने के लिये पसीना सोखने वाले अच्छे मोजे पहनें। पैरों को हमेशा सूखा रखने की कोशिश करें। गीले मोजों को तुरंत बदलें। जरूरत पड़ने पर एंटी-ब्लिस्टर टेप या फुट पैड का इस्तेमाल करें। छोटे-छोटे उपाय यात्रा के दौरान बड़ी परेशानी से बचा सकते हैं। दिनभर चलने के बाद पैरों को आराम देना बहुत जरूरी है। रात में हल्के गुनगुने सरसों, नारियल या तिल के तेल से 10 से 15 मिनट तक पैरों की मालिश करें। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। मांसपेशियों का तनाव कम होता है।
अगले दिन चलने के लिये पैरों को आराम मिलता है। शरीर में पानी की कमी न होने दें। लंबी दूरी तक पैदल चलने से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। यात्रा के दौरान, नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें। जरूरत पड़ने पर ओआरएस, नींबू पानी या इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक लें। पर्याप्त हाइड्रेशन से कमजोरी, चक्कर और मांसपेशियों में ऐंठन का खतरा कम होता है।
बैग में जरूर रखें ये जरूरी सामान
कांवड़ यात्रा पर निकलते समय छोटी-सी फर्स्ट एड किट जरूर साथ रखें। इसमें बैंडेज, एंटीसेप्टिक क्रीम, कॉटन, दर्द निवारक स्प्रे, अतिरिक्त मोजे, आरामदायक फुटवियर, जरूरत के समय यही छोटी चीजें बड़ी मददगार साबित हो सकती हैं। भक्ति के उत्साह में कई बार लोग शरीर के संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। अगर चलते समय पैरों में तेज दर्द, सूजन, चोट या ज्यादा छाले हो जायें तो कुछ देर रुककर आराम जरूर करें। जबरदस्ती आगे बढ़ने से परेशानी बढ़ सकती है। शरीर को समय-समय पर आराम देने से यात्रा सुरक्षित और सुखद बनी रहती है। आस्था की राह पर कदम मजबूत हों, यही तैयारी जरूरी है।
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